ट्रॉमा से ट्रायंम्प तक: 12 वर्षीय ‘कार्ला’ की मार्मिक कहानी और ‘रेन्वॉर’ की बाल कल्पनाओं ने IFFI-2025 में बांधा दर्शकों को

23 November, 2025, 9:50 pm


 23 नवंबर 2025 IFFI-2025 के परदे आज दो ऐसी असाधारण कहानियों से जगमगाए, जिन्होंने बचपन की संवेदनाओं, साहस, जिज्ञासा और कल्पनाओं को नए अर्थ दिए। 12 वर्षीय कार्ला की अदालत में लड़ी गई बहादुर लड़ाई से लेकर 11 वर्षीय फुकी की मासूम कल्पनाओं तक—ये दोनों फिल्में दर्शकों को भीतर तक छू जाती हैं।

56वें IFFI में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में Karla की निर्देशक क्रिस्टीना थेरेसा टॉर्नात्ज़ेस और Renoir के को-प्रोड्यूसर क्रिस्टोफ ब्रंचर ने अपनी फिल्मों के पीछे की भावनात्मक यात्राओं को साझा किया।

कार्ला: सच और सम्मान के लिए एक बच्ची की लड़ाई

फिल्म Karla 12 वर्षीय एक साहसी लड़की की वास्तविक कहानी पर आधारित है, जो अपने अपमानित और शोषित बचपन को न्यायालय में अपने पिता के खिलाफ आवाज उठाकर चुनौती देती है। निर्देशक क्रिस्टीना टॉर्नात्ज़ेस ने बताया कि कार्ला के लिए यह “शब्द बनाम शब्द” वाली लड़ाई सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि एक भावनात्मक तूफान थी।

फिल्म कार्ला की आंखों से उसके भीतर के दर्द, हिचकिचाहट और ट्रॉमा को बेहद संवेदनशील तरीके से सामने लाती है। इस संघर्ष में जज का किरदार बेहद अहम है—जो कार्ला को सिर्फ सुनता ही नहीं बल्कि उसे अपनी आवाज वापस पाने में मदद करता है।

निर्देशक ने कहा कि बच्चों के साथ यौन हिंसा सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि वैश्विक समस्या है, और उनकी फिल्म survivor-centric है—जहां कहानी बच्चे की गरिमा और संवेदनाओं को बचाए रखते हुए कही गई है।

मुन्गिख (Munich) में फिल्म के प्रीमियर को ‘होम रन’ बताते हुए उन्होंने IFFI में इसे पहली बार भारतीय दर्शकों के सामने लाने के उत्साह को साझा किया। उन्होंने यह भी बताया कि 12 वर्षीय लीड एक्ट्रेस के साथ एक सुरक्षित, सहज और रचनात्मक माहौल बनाने पर पूरा जोर दिया गया ताकि उसका अभिनय स्वाभाविक और प्रभावी रहे।

रेन्वॉर: एक बच्ची की कल्पनाओं से भरी रंगीन दुनिया

को-प्रोड्यूसर क्रिस्टोफ ब्रंचर ने Renoir के बारे में बताया कि यह नाम भले ही प्रसिद्ध पेंटर रेन्वॉर की याद दिलाता हो, पर यह फिल्म इम्प्रेशनिस्ट पेंटिंग की तरह छोटे-छोटे पलों से बनी एक कोमल और काव्यात्मक कहानी है।

1987 के आर्थिक उभार वाले टोक्यो में स्थापित यह फिल्म 11 वर्षीय फुकी की कहानी कहती है—एक संवेदनशील बच्ची की, जो अपने पिता की गंभीर बीमारी और मां की भावनात्मक थकान के बीच अपनी कल्पनाशील दुनिया में शरण लेती है।

फुकी जादू, टेलीपैथी और यहां तक कि डेटिंग हॉटलाइन को भी अपनी मासूम जिज्ञासा से एक्सप्लोर करती है। ब्रंचर ने कहा—
“बच्चे बड़े-बड़े मुद्दों को अपने छोटे-छोटे तर्कों से समझते हैं। फुकी की कल्पनाएं उसकी दुनिया को संभालने का तरीका हैं।”

फिल्म बचपन के अकेलेपन, परिवार की टूटती-बनती संवेदनाओं और समाज के बदलते दौर को बेहद खूबसूरती से दिखाती है। फुकी का किरदार निभाने वाली युवा अदाकारा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली—कान्स में बेस्ट एक्ट्रेस से मामूली रूप से चूकीं, लेकिन एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवॉर्ड्स में बेस्ट न्यू परफॉर्मर जीतकर एक चमकदार प्रतिभा साबित हुईं।

फिल्मों के बारे में

1. Karla

  • देश: जर्मनी

  • भाषा: जर्मन

  • अवधि: 104 मिनट

  • वर्ष: 2025

  • थीम: एक बच्ची की यौन शोषण के खिलाफ सच्चाई और सम्मान की लड़ाई

1962 के म्यूनिख की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म एक 12 वर्षीय लड़की का साहसिक संघर्ष दिखाती है, जो अपने पिता पर यौन शोषण का आरोप लगाकर न्याय की मांग करती है। फिल्म अदालत, समाज और मनोवैज्ञानिक पीड़ा के बीच एक बच्ची की चुप्पी टूटने की संवेदनशील यात्रा को सीधे और सम्मानजनक तरीके से सामने लाती है।

2. Renoir

  • देश: जापान, फ्रांस, सिंगापुर, फिलीपींस, इंडोनेशिया, कतर

  • भाषा: जापानी

  • अवधि: 116 मिनट

  • वर्ष: 2025

  • थीम: बचपन की कल्पना, परिवार की चुनौतियाँ और भावनात्मक परिपक्वता

1987 के टोक्यो की तेज रफ्तार जिंदगी में फुकी अपने बीमार पिता, तनावग्रस्त मां और बदलते पारिवारिक माहौल के बीच कल्पनाओं से जीवन को समझने की कोशिश करती है। फिल्म बचपन के एहसासों, मासूम साहस और जीवन के सबक को मार्मिक तरीके से उकेरती है।

IFFI के बारे में

1952 में शुरू हुआ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव है। NFDC और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ गोवा सरकार द्वारा आयोजित यह महोत्सव विश्वभर की फिल्मों, कलाकारों और सिनेमाई नवाचारों का संगम है।
20–28 नवंबर तक चल रहे 56वें संस्करण में दुनिया भर की बहुभाषी, बहुशैली और बहुसांस्कृतिक फिल्मों की चमक देखने को मिल रही है—जहां मास्टरक्लास, प्रत‍ियोगिताएं और प्रतिष्ठित WAVES फिल्म बाज़ार इसे और भी खास बनाते हैं।