दिल्ली विधानसभा में ‘संविधान दिवस’ समारोह: उपराष्ट्रपति ने जारी की भारत की विधायी यात्रा पर कॉफी टेबल बुक

26 November, 2025, 10:12 pm

 

दिल्ली विधान सभा में आज ‘संविधान दिवस’ बड़े ही गरिमामय ढंग से मनाया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने भारत की विधायी यात्रा पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। यह पुस्तक देश की लोकतांत्रिक परंपरा के उस अहम पड़ाव को रेखांकित करती है, जब 100 वर्ष पहले स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय स्पीकर श्री विट्ठलभाई पटेल का निर्वाचन हुआ था।

संविधान—भारत की आत्मा और आकांक्षाओं का जीवंत दस्तावेज: उपराष्ट्रपति

अपने उद्बोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो देश की लोकतांत्रिक यात्रा को सतत दिशा देता आ रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान बुद्धिमत्ता, अनुभव, पीड़ा और उम्मीद की नींव पर बना है और यह उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और सपनों को समाहित करता है जिन्होंने आज़ाद भारत का सपना देखा था।

उपराष्ट्रपति ने संविधान निर्माण में डॉ. भीमराव अंबेडकर की निर्णायक भूमिका का विशेष उल्लेख किया और कहा कि उनकी दूरदर्शिता ने हमारे संविधान को भारत की आत्मा और आकांक्षाओं का दर्पण बनाया।

26 नवंबर—जनजागरण का पर्व

उन्होंने बताया कि 2015 से हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, जो अब पूरे देश में नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का व्यापक अभियान बन चुका है। यह साल संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के वर्ष-भर चलने वाले उत्सव का भी समापन है, जो 2024 में हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान के रूप में शुरू हुआ था।

भारत का आत्मविश्वासी उदय

उपराष्ट्रपति ने अमृत काल में देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्शों के मार्गदर्शन में भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि कभी कमजोर अर्थव्यवस्था समझे जाने वाला भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और शीघ्र ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की राह पर है।

गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा की मिसाल

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, जो मानव इतिहास की एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से 100 करोड़ नागरिक विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा—“ये उपलब्धियां छोटी नहीं हैं। ये हमारे संविधान-निर्माताओं के सपनों को साकार करने वाले मील के पत्थर हैं।”

दिल्ली विधानसभा की सराहना

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विधानसभा की विविध पेशेवर पृष्ठभूमि का स्वागत किया और वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर समुदाय और दिव्यांगजनों के लिए समर्पित समितियों की स्थापना को सराहनीय बताया।

उन्होंने मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व को महिला सशक्तिकरण से महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में देश की प्रगति का प्रतीक बताया।

उन्होंने यह भी याद किया कि दिल्ली विधानसभा का भवन कभी इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल और केंद्रीय विधायी सभा का केंद्र रहा है, जहां अधिकारों, नागरिकता और प्रतिनिधिक शासन पर ऐतिहासिक बहसें हुई थीं।

विधान यात्रा पर कॉफी टेबल बुक का महत्व

उपराष्ट्रपति ने बताया कि इस कॉफी टेबल बुक में दुर्लभ तस्वीरें, ऐतिहासिक भाषणों के अंश, 2025 में आयोजित अखिल भारतीय अध्यक्ष सम्मेलन की झलकियां और विट्ठलभाई पटेल सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं के अभिलेख शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को भारत की विधायी यात्रा से जोड़ने में सहायक होगी।

विकसित भारत @2047 के लिए रचनात्मक राजनीति का आह्वान

उन्होंने सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे संवाद, बहस और विचार-विमर्श के माध्यम से रचनात्मक योगदान दें, क्योंकि यही विकसित भारत 2047 की दिशा में देश की यात्रा की आधारशिला है।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक कर्तव्यों को निभाने की अपील की और कहा—“दूसरों के अधिकारों का सम्मान, कानून का पालन, कर्तव्यों का निर्वहन और एकता की रक्षा—यही संविधान के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।”

समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर और श्री विट्ठलभाई पटेल की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता सहित कई मंत्री, विधायक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।