2025 से फिर रफ्तार पकड़ेगी जर्मन अर्थव्यवस्था: OECD

3 December, 2025, 9:57 am

 

बर्लिन / पेरिस: (DPA)
दो साल की मंदी के बाद जर्मन अर्थव्यवस्था एक बार फिर पटरी पर लौटने की तैयारी में है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के ताज़ा अनुमान के अनुसार, जर्मनी की अर्थव्यवस्था साल 2025 में मामूली बढ़त दर्ज करेगी, जबकि 2026 और 2027 में इसमें और तेज़ी आएगी।

मंगलवार को जारी रिपोर्ट में OECD ने कहा कि 2025 में जर्मनी की जीडीपी में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की संभावना है। इसके बाद 2026 में 1 प्रतिशत और 2027 में 1.5 प्रतिशत तक आर्थिक वृद्धि हो सकती है।

हालांकि, 2026 के अनुमान को सितंबर की रिपोर्ट के मुकाबले 0.1 प्रतिशत कम किया गया है, क्योंकि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अभी भी 2023 और 2024 में आई मंदी के असर से पूरी तरह उबर नहीं पाई है।

बढ़ेगा घरेलू उपभोग

OECD के अनुसार, जर्मनी में निजी उपभोग (Private Consumption) में वृद्धि देखने को मिलेगी। इसकी वजहें हैं:

  • महंगाई में कमी

  • वेतन में लगातार वृद्धि

  • घरेलू नीतिगत अनिश्चितता में गिरावट

रिपोर्ट में कहा गया है कि कम महंगाई और बढ़ती आय से आम लोगों की खर्च करने की क्षमता में सुधार आएगा, जिससे घरेलू मांग मजबूत होगी।

अमेरिकी टैरिफ और व्यापार नीति चिंता का कारण

हालांकि, OECD ने यह भी चेतावनी दी है कि अमेरिकी व्यापार नीतियों और ऊँचे टैरिफ (शुल्क) की वजह से जर्मनी के निर्यात और निवेश पर दबाव बना रह सकता है, खासकर उन उद्योगों पर जो निर्यात पर निर्भर हैं।

निवेश में भी दिखेगा सुधार

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी निवेश बढ़ने की संभावना है, क्योंकि:

  • कंपनियों के पास पर्याप्त बचत है

  • ब्याज दरों में कटौती हो रही है

  • घरेलू स्तर पर नीति स्थिरता बढ़ रही है

दुनिया की अर्थव्यवस्था भी स्थिर

OECD के मुताबिक, सभी सदस्य देशों को मिलाकर 2025 में वैश्विक वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि 2026 में यह थोड़ी घटकर 2.9 प्रतिशत रह सकती है, लेकिन 2027 में फिर 3.1 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।

OECD के विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर रही है। इसकी वजहें हैं:

  • बेहतर वित्तीय स्थिति

  • AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से जुड़ा बढ़ता निवेश

  • मजबूत व्यापार

  • संतुलित आर्थिक नीतियां

हालांकि वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में वैश्विक व्यापार में गिरावट देखी गई और आने वाले दिनों में ऊँचे टैरिफ के कारण कीमतें बढ़ने और विकास दर धीमी पड़ने की आशंका भी जताई गई है।

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