जर्मनी का उच्च समुद्रों (High Seas) पर संरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए यूएन संधि को मंज़ूरी देने की दिशा में बड़ा कदम

3 December, 2025, 7:11 pm

 

बर्लिन (dpa) — जर्मनी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक महत्वपूर्ण संधि को संसद से मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत पहली बार अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र यानी हाई सीज़ (High Seas) में संरक्षित समुद्री क्षेत्र (Marine Protected Areas) बनाए जा सकेंगे।

बुधवार को जर्मन कैबिनेट ने एक मसौदा कानून को मंजूरी दी, जिसे अब संसद में पेश किया जाएगा। हालांकि जर्मनी पहले ही इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है, लेकिन औपचारिक रूप से इसे लागू करने के लिए संसद से कानून पारित होना जरूरी है।

 क्या है हाई सीज़ ट्रीटी?

यह संधि देशों को यह अधिकार देती है कि वे उन समुद्री क्षेत्रों में संरक्षित ज़ोन बना सकें, जो किसी भी देश के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। ऐसे क्षेत्र दुनिया के महासागरों के लगभग दो-तिहाई हिस्से में फैले हुए हैं।

इस संधि के तहत मछली पकड़ने, समुद्री खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों पर पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन भी अनिवार्य होगा।

 160 से अधिक देशों की सहमति

2023 में न्यूयॉर्क में लंबी बातचीत के बाद दुनिया के 160 से अधिक देशों ने इस ऐतिहासिक समझौते पर सहमति जताई थी। अब जर्मनी उन देशों में शामिल हो रहा है, जो इसे कानूनी रूप देने की दिशा में सबसे पहले कदम उठा रहे हैं।

 महासागरों पर बढ़ता संकट

जर्मनी के पर्यावरण मंत्री कार्स्टन श्नाइडर ने कहा कि महासागर आज भारी संकट में हैं।

“प्लास्टिक प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने, रसायनों और जलवायु परिवर्तन के कारण महासागर गंभीर दबाव में हैं। महासागर हमारे जीवन के लिए जरूरी हैं — वे हमें ऑक्सीजन देते हैं, भोजन देते हैं और दुनिया का सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र हैं।”

उन्होंने कहा कि ऐसे संरक्षित क्षेत्रों का निर्माण बेहद जरूरी है, ताकि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को दोबारा स्वस्थ होने का अवसर मिल सके।

‘हाई सीज़’ क्या हैं?

हाई सीज़ वे समुद्री क्षेत्र होते हैं, जो किसी भी देश की सीमाओं से बाहर होते हैं। ये क्षेत्र किसी एक राष्ट्र के अधीन नहीं होते और अब तक इन पर कोई समान वैश्विक पर्यावरणीय कानून लागू नहीं था। यही वजह है कि यहां अंधाधुंध शोषण होता रहा है।

नई संधि से यह उम्मीद की जा रही है कि इन क्षेत्रों की बेहतर रक्षा की जा सकेगी और जैव विविधता को संरक्षित किया जा सकेगा।

(क्रमशः अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण राजनीति और समुद्र संरक्षण पर जर्मनी की भूमिका मजबूत होने की ओर एक अहम कदम)