‘स्थान’ का विचार: भीतर की दुनिया और बाहरी परिवेश का संगम — अनन्या वाजपेयी
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चंडीगढ़:
“ये यात्राएं सिर्फ शहरों की नहीं, मन की भी हैं — यही वह धागा है जो इन अलग-अलग, असंबद्ध लगने वाले लेखों को जोड़ता है,” यह कहना है प्रसिद्ध लेखिका और शिक्षाविद अनन्या वाजपेयी का। उनकी नई पुस्तक ‘Place: Intimate Encounters with Cities’ (Women Unlimited Press) में भारत और दुनिया के 13 शहरों से जुड़ी उनकी यात्राओं और अनुभवों का विस्तृत, बहुस्तरीय चित्रण है।
यह पुस्तक 6 दिसंबर को चंडीगढ़ में Thinkers Collective द्वारा जारी की जाएगी। यह पहल Institute for Development and Communication (IDC) और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (CU) की ओर से की गई है। कार्यक्रम शाम 4:30 बजे IDC परिसर में आयोजित होगा।
अनन्या वाजपेयी की प्रमुख कृतियों में ‘Righteous Republic: The Political Foundations of Modern India’ (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस) और ‘Ashis Nandy: A Life in Dissent’ (OUP) शामिल हैं। वे बताती हैं कि बार-बार किसी स्थान पर जाने और उससे जुड़ाव बढ़ने पर वह जगह उनके लिए बदल जाती है।
“इस किताब का संपादन मैंने इसी गर्मी में किया। मैंने अपनी पुरानी डायरियां, जर्नल्स, अप्रकाशित लेख, तस्वीरें, पत्र और स्मृतिचिन्ह दोबारा देखे। एक तरह से मुझे अपने कदम फिर से वहीं ले जाने पड़े। पाठकों को जो मिलेगा, वह एक अद्यतन संस्करण है,” वे कहती हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अध्यापन का अनुभव रखने वाली वाजपेयी फिलहाल अशोक विश्वविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर हैं। वे मानती हैं कि उनकी अकादमिक और साहित्यिक दुनिया एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं।
“मेरे लिए शोध और जीवन का अनुभव एक-दूसरे में घुले-मिले हैं। मैं विचारों पर लिखती हूं और अक्सर लाइब्रेरी में रहकर ही सबसे अच्छी यात्राएं कर लेती हूं। इस किताब में आपको किताबें, लेखक, दार्शनिक धाराएं, आंदोलन और विचारधाराएं देखने को मिलेंगी,” वे बताती हैं।
जब लेखन को सख्त विधाओं में बांटने की प्रवृत्ति पर बात होती है, तो वे कहती हैं कि इस संग्रह के कई लेख वास्तव में लघु-कहानियां हैं — हालांकि वे काल्पनिक नहीं हैं।
एक निबंध में उन्होंने बंबई (मुंबई) को डॉ. आंबेडकर के संदर्भ में देखा है, तो दूसरे में दिल्ली को अमीर खुसरो की दृष्टि से।
इस्तांबुल में वे उस शहर को देखती हैं जैसा उसे ओरहान पामुक ने देखा था और वेनिस में उनकी मुलाकात दार्शनिक जियोर्जियो अगाम्बेन से होती है।
“मेरे लिए दिलचस्प मुलाकातें सिर्फ स्थानों से नहीं, बल्कि अन्य विचारशील मस्तिष्कों से भी होती हैं,” कहती हैं वाजपेयी, जो इस समय संस्कृत की आधुनिक स्थिति पर एक नई किताब भी पूरी कर रही हैं।
IDC के चेयरपर्सन डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि Thinkers Collective का उद्देश्य केवल किसी एक किताब पर चर्चा करना नहीं, बल्कि ऐसा मंच बनाना है जहां संवाद, विचार-विमर्श और रचनात्मक प्रक्रिया को समझा जा सके।
“हम चाहते हैं कि शोधकर्ता ही नहीं, बल्कि आम लोग भी यहां आएं और लेखक या विचारक के साथ एक खुली, दो-तरफा बातचीत का हिस्सा बनें — जहां वे सिर्फ रचनाकार को नहीं, बल्कि उसके पीछे के इंसान को भी जान सकें,” उन्होंने कहा।
यह कार्यक्रम चंडीगढ़ के बौद्धिक और साहित्यिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




