वॉटरशेड महोत्सव: अजमेर में जल संरक्षण की नई कहानी, समुदाय की भागीदारी केंद्र में

अजमेर, राजस्थान | 06 दिसंबर 2025 — राजस्थान सरकार 06 दिसंबर 2025 को अजमेर के जवाहरलाल नेहरू (JLN) मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में वॉटरशेड महोत्सव का आयोजन करने जा रही है। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत जिले में हुए महत्वपूर्ण कार्यों और उपलब्धियों का उत्सव होगा। महोत्सव का मुख्य संदेश है कि जब जल संरक्षण की कमान समुदाय के हाथों में होती है, तब जल सुरक्षा और अधिक मजबूत होती है।
कार्यक्रम में राज्य के पांच जिलों की टीमें अपने-अपने अनुभव साझा करेंगी। इसमें पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधि और वे समुदाय समूह शामिल होंगे, जिन्होंने सीधे तौर पर वॉटरशेड प्रबंधन और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में माननीय सांसद श्री भागीरथ चौधरी और अजमेर जिले के छह विधायकों की उपस्थिति भी संभावित है।
इस आयोजन में पिरामल फाउंडेशन, जो जलागम और मृदा संरक्षण विभाग का एक महत्वपूर्ण भागीदार है, जल स्रोतों के समुदाय-नेतृत्व वाले पुनर्जीवन के कार्यों को मजबूती से सामने लाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर पिरामल फाउंडेशन और ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन (ATECF) द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई एक लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी। यह फिल्म दिखाएगी कि कैसे जलाशयों की गाद हटाने (डिसिल्टिंग) से जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, और यह कार्य किस प्रकार MJSA के तहत तथा वित्त आयोग (FFC) की निधि से किया जा सकता है। यह एक कम लागत वाला, व्यावहारिक मॉडल है जो जन भागीदारी पर आधारित है, जहां समुदाय केवल भागीदार नहीं बल्कि मालिक बन जाता है।
पिछले तीन वर्षों में ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन और उसके साझेदार संगठनों ने राजस्थान के 12 जिलों में लगभग 1,180 जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया है। हाल ही में FFC फंडिंग और पिरामल फाउंडेशन के सहयोग से इस कार्य को और विस्तार मिला है। इसमें से 14% कार्य नीति आयोग के आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में हुआ है, जिससे 1,191 करोड़ लीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है। यह मात्रा 10 लाख से अधिक टैंकरों के बराबर है। इन प्रयासों से लगभग 1,700 गांवों के 17 लाख लोगों को लाभ पहुंचा है।
WRIS (जल संसाधन सूचना प्रणाली) के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में लगभग 82,000 जल स्रोत हैं, जिनमें से 49,000 को पुनर्जीवित किया जा सकता है। यदि राज्य में जल स्रोतों के पुनर्जीवन को MJSA से बड़े पैमाने पर जोड़ा जाए, तो इससे करीब 26,000 गांवों की जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इससे 33,210 करोड़ लीटर अतिरिक्त भंडारण क्षमता बनेगी और करीब ₹9,963 करोड़ की टैंकर लागत की बचत हो सकती है।
पिरामल फाउंडेशन की स्कूल ऑफ क्लाइमेट एंड सस्टेनेबिलिटी की लीड संगीता ममगैन ने कहा,
“पिछले 17 वर्षों से पिरामल फाउंडेशन राजस्थान सरकार के साथ मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में काम करता रहा है। अब हम अपने गांधी फेलोशिप मॉडल को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में लागू कर रहे हैं। अजमेर में MJSA के तहत जल स्रोतों के मशीन-आधारित पुनर्जीवन के जरिए हम एक अधिक जल-सुरक्षित और जलवायु-लचीला राजस्थान बनाने में योगदान देना चाहते हैं।”
ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन की COO अमृथा कस्तूरी रंगन ने कहा,
“राजस्थान जल के महत्व को समझता है। जब सरकारी आंकड़ों और समुदाय की भागीदारी को एक साथ लाया जाता है, तब बड़े स्तर पर बदलाव संभव होता है। वॉटरशेड महोत्सव इस साझा प्रयास को सम्मान देने और आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच है।”
राजस्थान सरकार के जलागम विकास और मृदा संरक्षण विभाग के निदेशक श्री मोहम्मद जुनैद पी. पी., IAS ने कहा,
“MJSA के पहले चरण का असर ज़मीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है, लेकिन आगे की यात्रा अभी लंबी है। हम CSOs और CSR भागीदारों के साथ मिलकर सबसे प्रभावी नवाचारों और उपायों को लागू करना चाहते हैं ताकि राज्य भर के समुदायों को स्थायी लाभ मिल सके।”
वॉटरशेड महोत्सव का उद्देश्य है—सरकारी एजेंसियों, समुदायों और सहयोगी संस्थाओं को एक मंच पर लाकर सफल मॉडलों को पहचान देना, जमीनी अनुभवों से सीखना और एक जल-सुरक्षित राजस्थान की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना।




