रोहित की याद में जलीं सैकड़ों मोमबत्तियाँ, न्याय के लिए गांव-गांव उठा विद्रोह

रोहतक | हुमायूंपुर–बखेता
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रोहित धनखड़ की नृशंस हत्या के बाद न्याय की आस लगाए बैठे हुमायूंपुर और बखेता गांव के लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है। आज दोनों गांवों में रोहित के घर से लेकर पूरे गांव तक एक ऐतिहासिक, भावनात्मक और आक्रोश से भरा कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें हर उम्र, हर वर्ग और हर गली के लोग कंधे से कंधा मिलाकर शामिल हुए। छोटे बच्चे हाथों में मोमबत्तियाँ लिए थे, महिलाएं आँखों में आँसू और दिल में गुस्सा लेकर चल रही थीं, बुजुर्ग कांपती आवाज़ में इंसाफ की गुहार लगा रहे थे और युवा वर्ग पूरे जोश के साथ “रोहित के हत्यारों को सज़ा दो”, “न्याय नहीं तो चैन नहीं” जैसे नारों से गांव की गलियों को गुंजायमान कर रहा था। पूरा गांव आज शोक, गुस्से और न्याय की आग में एक साथ खड़ा दिखाई दिया।
कैंडल मार्च के दौरान पंचायत, खाप प्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों ने यह भी ऐलान किया कि कल पंचायत व खाप के प्रतिनिधिमंडल भिवानी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात करेंगे और इस मामले में अब तक की कार्रवाई पर सीधा जवाब मांगेंगे। इसके बाद परसों हरियाणा के पुलिस महानिदेशक श्री ओ.पी. सिंह से भी पंचकूला में पंचायत व खाप का प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा और पूरे मामले की निष्पक्ष, तेज़ और ठोस जांच की मांग रखेगा। पंचायत ने स्पष्ट कहा कि यदि इन दोनों उच्च स्तरीय बैठकों के बाद भी कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया, न हत्यारों की गिरफ्तारी हुई और न ही जांच ने सही दिशा पकड़ी, तो आंदोलन की आगे की रूपरेखा तय करने के लिए पंचायत की आपात बैठक बुलाई जाएगी, जिसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। पंचायत का कहना है कि उनका उद्देश्य संघर्ष नहीं बल्कि न्याय है, लेकिन अब धैर्य की सीमा समाप्त होती दिखाई दे रही है।
कैंडल मार्च की शुरुआत रोहित धनखड़ के घर से हुई, जहाँ पहले रोहित की तस्वीर के सामने मोमबत्तियाँ जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, सैकड़ों लोग हाथों में जलती मोमबत्तियाँ लेकर पूरे गांव की गलियों से गुजरे। हर मोमबत्ती उस दर्द का प्रतीक थी जो एक माँ के सीने में दहक रहा है, हर कदम उस सवाल की तरह था जो प्रशासन से पूछा जा रहा है—“10 दिन बीत गए, 48 घंटे का आश्वासन भी खत्म हो गया, फिर भी हत्यारे क्यों खुले घूम रहे हैं?” मार्च के दौरान लोगों की आँखें बार-बार भर आती थीं और जुबान पर एक ही पुकार थी—“रोहित को न्याय दो, उसके हत्यारों को फांसी दो।”
ग्रामीणों का कहना है कि रोहित केवल एक व्यक्ति नहीं था, वह पूरे क्षेत्र की पहचान था। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया, जिसने मेहनत और अनुशासन से युवाओं को प्रेरित किया। उसी रोहित की सिर्फ इस बात पर हत्या कर दी गई कि उसने एक शादी समारोह में लड़कियों के सामने गाली-गलौज और हुड़दंग करने से मना कर दिया था। यह हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के संस्कार, सम्मान और भविष्य की हत्या है—आज यही बात हर ग्रामीण की जुबान पर थी।
कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने खुले शब्दों में कहा कि उन्हें अब तक पुलिस की जांच पर भरोसा डगमगाता हुआ दिखाई दे रहा है। 10 दिन बीत चुके हैं, 48 घंटे का आश्वासन भी समाप्त हो चुका है, लेकिन न तो कोई नामजद आरोपी गिरफ्तार हुआ, न ही 15–20 हमलावरों में से किसी एक को पकड़ा गया। लोगों का सवाल है कि जब पूरे गांव, पंचायत और परिवार बार-बार सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, लोकेशन और संदिग्धों की जानकारी दे चुके हैं, तो फिर जांच आगे क्यों नहीं बढ़ रही? आखिर किसके दबाव में पुलिस के हाथ रुक जाते हैं? क्या एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का खून इतना सस्ता है?
कैंडल मार्च के दौरान रोहित की माँ की हालत देखकर हर आंख नम थी। गांव की महिलाएं उन्हें संभालती रहीं, क्योंकि वह बार-बार बेसुध हो रही थीं। उनका एक-एक शब्द लोगों के दिल को चीर रहा था—“पहले मेरे पति चला गया, अब मेरा बेटा भी चला गया… अब मुझे इंसाफ चाहिए।” परिवार का कहना है कि रोहित की माँ और बहन गंभीर मानसिक तनाव में हैं और यह स्थिति प्रशासन की जिम्मेदारी को और भी बढ़ा देती है। यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो इसका दुष्परिणाम केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा।
कैंडल मार्च के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन कमजोर नहीं। यह न्याय की रोशनी है, जो अंधेरे सिस्टम को आइना दिखा रही है। लोगों ने यह भी साफ किया कि अब यह लड़ाई केवल रोहित के परिवार की नहीं रही, बल्कि यह पूरे क्षेत्र, पूरे समाज और हर उस युवा की लड़ाई बन चुकी है जो अपने भविष्य को सुरक्षित देखना चाहता है। आज जिस तरह पूरा गांव एक साथ सड़कों पर उतरा, उसने यह संदेश साफ दे दिया है कि अगर प्रशासन ने अब भी ठोस कार्रवाई नहीं की, तो यह जनआक्रोश और भी व्यापक रूप ले सकता है।
ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों ने मीडिया के माध्यम से सरकार और पुलिस प्रशासन से सीधी अपील की कि अब और देरी न की जाए। हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की जाए, जांच को निष्पक्ष एजेंसी को सौंपा जाए और परिवार को यह भरोसा दिया जाए कि उनका बेटा यूं ही भुला नहीं दिया जाएगा। लोगों का कहना है कि अगर आज रोहित को न्याय नहीं मिला, तो कल कोई और रोहित इस सिस्टम की बलि चढ़ सकता है।
आज का कैंडल मार्च केवल मोमबत्तियों की कतार नहीं था, यह न्याय की लौ थी, जो अंधेरे को चुनौती दे रही थी। यह मार्च यह बता गया कि रोहित की यादें अभी जिंदा हैं, उसका संघर्ष जिंदा है और उसे न्याय दिलाने का संकल्प भी जिंदा है। पूरा हुमायूंपुर और बखेता आज एक स्वर में बोल उठा—
“रोहित को न्याय दो… रोहित के हत्यारों को सज़ा दो।”




