फ्रेडरिक मर्ज़ के बदले सुर: बोले बिना प्रवासन(Migration) के जर्मनी का काम नही चलेगा

10 December, 2025, 10:20 am

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने प्रवासन पर बयान को लेकर की आत्मालोचना, कहा—"हमारी शहरों की हालत से इनकार नहीं"

बर्लिन, जर्मनी:( DPA)जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने प्रवासन (Migration) के प्रभावों को लेकर जारी राष्ट्रीय बहस में अपने पूर्व बयान पर आत्मालोचना की है। उन्होंने माना कि वह अपने बयान को और स्पष्ट तरीके से रख सकते थे।

सोमवार शाम सार्वजनिक प्रसारक ARD पर नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया के एक कस्बे में स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कार्यक्रम के दौरान मर्ज़ ने कहा:

"शायद मुझे पहले ही साफ़-साफ़ कहना चाहिए था कि मेरा मतलब क्या था… आज मैं इसे थोड़ा अलग तरह से कहता।"

"हमें प्रवासन की जरूरत है" — मर्ज़

मर्ज़ ने स्वीकार किया कि जर्मनी की कई शहरें उपेक्षा का शिकार हुई हैं और स्थिति बदली जानी चाहिए।
उन्होंने कहा:

  • "हमारे देश को प्रवासन की ज़रूरत है।"

  • "स्वास्थ्य क्षेत्र, केयर सेक्टर और कई अन्य क्षेत्रों में प्रवासी कर्मचारियों के बिना काम ही नहीं चल सकता।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जर्मनी में नियमों का पालन न करने वालों को देश में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए:

"जो यहां रहना चाहते हैं, उन्हें हमारे नियमों का पालन करना होगा। अगर वे नहीं करते, तो उन्हें जाना होगा।"

अक्टूबर वाले विवादित बयान पर सफाई

अक्टूबर में मर्ज़ ने कहा था कि पिछली प्रवासन नीतियों की गलतियों को सुधारने की कोशिश हो रही है। उन्होंने दावा किया था कि प्रवासन से जुड़े कुछ समूहों की वजह से शहरों की "हालत खराब" दिखती है और इसलिए बड़े पैमाने पर निर्वासन (deportation) किए जा रहे हैं।

जब उनसे इस बयान का आशय पूछा गया तो उन्होंने कहा था:

"अपनी बेटियों से पूछिए कि मेरा मतलब क्या था।"

बाद में मर्ज़ ने स्पष्ट किया कि वह उन प्रवासियों की बात कर रहे थे:

  • जिनके पास स्थायी रहने का दर्जा नहीं,

  • जो काम नहीं करते,

  • और जो जर्मनी के नियमों का पालन नहीं करते।

समाज में बढ़ती बहस

जर्मनी में प्रवासन और शरणार्थियों पर बहस लंबे समय से राजनीतिक एजेंडा में महत्वपूर्ण जगह रखती है। मर्ज़ के बयान और अब उनकी आत्मालोचना ने इस मुद्दे पर नई चर्चा छेड़ दी है कि जर्मनी को प्रवासन की जरूरत भी है और व्यवस्था में सुधार भी।