भारतीयता के मूल में आध्यात्म, सांस्कृतिक चेतना से राष्ट्र सशक्त : मनोज जोशी

नोएडा | 15 दिसम्बर 2025
प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में नोएडा सेक्टर–62 स्थित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में आयोजित ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ के अंतर्गत ‘नवोत्थान के नए क्षितिज’ विषय पर दूसरे दिन देश के मीडियाकर्मियों, विचारकों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने समसामयिक मुद्दों पर गहन विमर्श किया। इस अवसर पर संघ की ‘केशव संवाद’ पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया गया।
आर्थिक नवोत्थान : स्वदेशी डिजिटल इकोसिस्टम की आवश्यकता
‘धर्मस्य मूलं अर्थः’ (आर्थिक क्षेत्र में नवोत्थान) विषय पर प्रथम सत्र में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी चुनौती अपना स्वदेशी, आत्मनिर्भर डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना है। एप्पल, अमेज़न, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी विदेशी कंपनियाँ हर वर्ष देश से अरबों रुपये बाहर ले जा रही हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में भारत की स्थिति पर गंभीर चिंतन आवश्यक है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2014 के बाद भारत की आर्थिक वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रेलवे, हवाई सेवाओं, एक्सप्रेस-वे सहित बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विकास हुआ है और यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रणाली बन चुकी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य रूपेश कुमार ने कहा कि एक समय विश्व व्यापार का 25 प्रतिशत भारत से होता था। आज युवा भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स शुरू हो चुके हैं, जिनमें 48 प्रतिशत में महिलाएँ निदेशक हैं और 18 प्रतिशत स्वामित्व में हैं। सरकार की नीतियों से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बुनियादी ढांचे का विकास तेज़ हुआ है और मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
इस सत्र का संचालन ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हरीश बर्णवाल ने किया। उन्होंने कहा कि आज समय नरेटिव और विचारों की प्रतिस्पर्धा का है और परिवर्तन स्पष्ट दिख रहा है।
सामाजिक नवोत्थान : ‘हिन्दवः सोदरा सर्वे’
दूसरे सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले ने कहा कि भारत का दर्शन विश्व-कल्याण का संदेश देता है—वसुधैव कुटुम्बकम् हमारी मूल भावना है। प्राचीन भारत में जाति व्यवस्था कर्म आधारित थी; ‘आर्य’ शब्द श्रेष्ठता का द्योतक था, न कि जाति का। मत परिवर्तन सरल हो सकता है, पर मन परिवर्तन के लिए निरंतर सामाजिक प्रयास आवश्यक हैं।
वी केयर फिल्म फेस्टिवल एंड ब्रदरहुड के निदेशक सतीश कपूर ने कहा कि भारतीय संस्कार समानता और सम्मान सिखाते हैं। 2014 के बाद समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है—दिव्यांगजनों और पैरा ओलंपिक विजेताओं को समान सम्मान मिल रहा है। सिनेमा और संवाद की संस्कृति में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता है।
इस सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं टीवी एंकर रामवीर श्रेष्ठ ने किया।
सांस्कृतिक नवोत्थान : ‘जननी जन्मभूमिश्च’
तीसरे सत्र में अभिनेता एवं रंगकर्मी मनोज जोशी ने कहा कि भारतीयता के मूल में आध्यात्म है। आक्रांताओं द्वारा नालंदा जैसे विश्वविद्यालय जलाए जाने के बावजूद श्रुति–स्मृति परंपरा के माध्यम से ज्ञान सुरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि यदि रामायण जैसी ग्रंथ-परंपरा न होती, तो व्यापक धर्मांतरण संभव था। आज शिक्षा के प्रभाव से युवा पीढ़ी इन मूल्यों को समझ रही है। श्रोताओं के अनुरोध पर मनोज जोशी ने ‘चाणक्य’ धारावाहिक के संवाद प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य राजीव तुली ने कहा कि समाज जैसी शिक्षा और संस्कार पाएगा, वैसा ही उसका स्वरूप बनेगा। सकारात्मक मूल्यों से समाज स्वतः सही दिशा में अग्रसर होता है।
इंडिया टीवी की एंकर मीनाक्षी जोशी ने कहा कि जब सांस्कृतिक चेतना प्रबल होती है, तब राष्ट्र मजबूती के साथ आगे बढ़ता है; इसके लिए वैचारिक और सांस्कृतिक सुदृढ़ता आवश्यक है।
सहभागिता और समापन
सभी सत्रों के अंत में वक्ताओं ने श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम में आरएसएस के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड के प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष प्रीति दादू, प्रेरणा विमर्श–2025 के अध्यक्ष अनिल त्यागी, समन्वयक श्याम किशोर सहाय, सह संयोजक अखिलेश चौधरी, सचिव मोनिका चौहान, नोएडा विभाग संघचालक सुशील कुमार, एनआईओएस अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋतु दुबे तिवारी, डॉ. मनमोहन सिसोदिया एवं मोनिका चौहान ने संयुक्त रूप से किया। समापन पर सभी का आभार व्यक्त किया गया।




