शिक्षण में एआई की भूमिका पर आईडीसी का पाँच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला

1 January, 2026, 5:56 pm

 

चंडीगढ़, 1 जनवरी: शिक्षण और शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बहुआयामी उपयोगों की संभावनाओं को समझने के उद्देश्य से चंडीगढ़ स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन (आईडीसी)—जो कि पंजाब विश्वविद्यालय का स्वीकृत शोध केंद्र है—ने 27 से 31 दिसंबर 2025 तक पाँच दिवसीय राष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का विषय था ‘शिक्षण और शोध में एआई टूल्स का एकीकरण: अकादमिक उत्पादकता में वृद्धि’

इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों—जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली—के शिक्षाविदों ने सत्र लिए। यूएई सहित देश के विभिन्न राज्यों—पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड—और चंडीगढ़ से 60 से अधिक प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया।

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि एआई शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है, बशर्ते शिक्षक केंद्र में बने रहें। एआई के माध्यम से नए विचारों, रचनात्मकता और शोध के नए आयाम खुलने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। साथ ही, शिक्षा और अनुसंधान में नवीन तकनीकों को अपनाकर क्षमता निर्माण और अकादमिक दृष्टिकोणों में विविधता लाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।

कार्यशाला का नेतृत्व करने वाली डॉ. अनुराधा सेखरी, एसोसिएट प्रोफेसर, शिक्षा विभाग, आईडीसी, चंडीगढ़ ने कहा कि एआई के एकीकरण से शिक्षण अनुभव अधिक रोचक बन सकते हैं, शिक्षा की पहुँच बढ़ सकती है और सीखने की प्रक्रिया को विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार ढाला जा सकता है।

आईडीसी के चेयरपर्सन डॉ. प्रमोद कुमार ने शिक्षा में तकनीक के प्रति दृष्टिकोण बदलने की जरूरत पर बल देते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि हम नई तकनीकों को संदेह की नजर से देखना बंद करें। हमें यह समझने की जरूरत है कि ये तकनीकें शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक भूमिका कैसे निभा सकती हैं। मुझे विश्वास है कि एआई शिक्षा के देने और पाने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। आईडीसी में हम ज्ञान के सृजन, प्रसार और उसके वास्तविक जीवन में उपयोग के लिए एआई आधारित क्षमता निर्माण पर काम कर रहे हैं। इसमें युवाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका के नए अवसर खोलने की अपार संभावनाएं हैं।”