कोटा की एक माँ का सपना और बेटी की क्षमता मिलकर महिलाओं, पर्यावरण और समाज के लिए दीर्घकालिक प्रभाव के लिए जुटी

5 January, 2026, 1:03 pm

अलबेली एक महिला-नेतृत्व वाला, ज़ीरो-वेस्ट सामाजिक उद्यम है, जिसकी नींव एक माँ के सपने और एक बेटी की कार्ययोजना पर रखी गई है। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कपड़ा-कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने के उद्देश्य से शुरू हुई। कोटा की प्रियंका चौधरी और उनकी बेटी यशस्विनी चौधरी वेस्ट प्रोडक्ट से 150 से अधिक महिलाओं को जोड़कर ‘अलबेली’ नाम से स्टार्टअप की नई और प्रेरक कहानी लिख रही हैं। हाडोती कोटा ट्रैवल मार्ट में हुई खास बातचीत में यशस्विनी चौधरी  ने बताया कि जहाँ माँ ने महिलाओं के साथ काम करने और हस्तकला को जीवित रखने का सपना देखा, वहीं बेटी ने उस सोच को एक संरचित, टिकाऊ और स्केलेबल मॉडल में विकसित किया। आज अलबेली 150 से अधिक महिला कारीगरों के साथ कार्य कर रहा है और निरंतर विस्तार की दिशा में अग्रसर है।

अलबेली फैशन और गारमेंट उद्योग से निकलने वाले कपड़ा-कचरे को अपसाइकिल कर रोज़मर्रा के उपयोग के लाइफस्टाइल उत्पाद बनाती है। इन उत्पादों का निर्माण पारंपरिक तकनीकों—जैसे सिलाई, पैचवर्क, एप्लीक और हाथ की कढ़ाई—के माध्यम से किया जाता है।

यह मॉडल महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, नियमित रोज़गार और आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करता है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण और ज़ीरो-वेस्ट सोच को बढ़ावा देता है।

अलबेली केवल एक ब्रांड नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार सामाजिक उद्यम है—जहाँ माँ का सपना और बेटी की क्षमता मिलकर महिलाओं, पर्यावरण और समाज के लिए दीर्घकालिक प्रभाव पैदा कर रही है।