यूरोपीय किसान मर्कोसुर व्यापार समझौते के खिलाफ सड़कों पर, पेरिस और जर्मनी में बड़े प्रदर्शन

रिपोर्ट- DPA
पेरिस/बर्लिन। यूरोपीय संघ (EU) और दक्षिण अमेरिकी देशों के समूह मर्कोसुर के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ यूरोप भर में किसानों का विरोध तेज हो गया है। किसानों को आशंका है कि इस समझौते से सस्ते कृषि उत्पाद यूरोपीय बाजार में आ जाएंगे, जिससे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान होगा।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में गुरुवार सुबह करीब 20 ट्रैक्टरों के साथ किसानों ने शहर में प्रवेश किया और एफिल टॉवर, आर्क डी ट्रायंफ और नेशनल असेंबली तक पहुंच गए। सुरक्षा बलों की कोशिशों के बावजूद किसानों ने प्रमुख रास्तों को जाम कर दिया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
पेरिस के बाहरी इलाकों में भी किसानों ने भारी वाहनों से मोटरवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इसके अलावा, फ्रांस और बेल्जियम के बीच दो प्रमुख सीमा चौकियों को भी ट्रैक्टरों से जाम कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस से ब्रसेल्स जाने वाले हाईवे और लिले से टुर्नाई जाने वाले मार्ग पर भी यातायात ठप रहा।
उधर, जर्मनी में भी किसानों ने देशभर में मोटरवे जंक्शनों को ब्लॉक कर EU–मर्कोसुर समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
25 साल से लंबित समझौता, अब निर्णायक मोड़ पर
यह विवादित व्यापार समझौता अर्जेंटीना, ब्राजील, उरुग्वे और पैराग्वे के साथ पिछले 25 वर्षों से बातचीत में है। इसे दिसंबर में साइन किया जाना था, लेकिन फ्रांस में हुए बड़े किसान आंदोलनों के कारण इसे टाल दिया गया।
अब यूरोपीय संघ में इस समझौते पर शुक्रवार को मतदान होना तय है। हाल ही में यूरोपीय आयोग ने फ्रांस को मनाने के लिए कुछ रियायतें भी प्रस्तावित की हैं। इनमें अमोनिया और यूरिया जैसे कुछ उर्वरकों पर कस्टम ड्यूटी अस्थायी रूप से हटाने का सुझाव शामिल है।
जर्मनी और स्पेन समर्थन में, इटली का रुख निर्णायक
जर्मनी और स्पेन इस समझौते के पक्ष में हैं। यदि इटली भी समर्थन में वोट देता है, तो फ्रांस के विरोध के बावजूद समझौता पारित हो सकता है।
इटली के कृषि मंत्री फ्रांसेस्को लोলোब्रिजिदा ने कहा कि बातचीत अब अंतिम चरण में है, लेकिन कृषि उत्पादों की सुरक्षा को लेकर और स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि मर्कोसुर से आयात बढ़ने से यूरोपीय किसानों को नुकसान होता है या कीमतें गिरती हैं, तो त्वरित सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिए।
वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार, यदि आयात में 8% से अधिक वृद्धि होती है तो समीक्षा शुरू होगी, लेकिन इटली चाहता है कि यह सीमा 5% की जाए, ताकि किसानों को जल्दी सुरक्षा मिल सके।
दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनने का दावा
यूरोपीय आयोग के अनुसार, यह समझौता लागू होने पर EU और मर्कोसुर देशों के बीच 700 मिलियन से अधिक आबादी वाला दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बन जाएगा। हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि इससे बड़े कृषि निर्यातक देशों को फायदा होगा, जबकि यूरोपीय छोटे और मध्यम किसान बाजार में टिक नहीं पाएंगे।




