30 से अधिक देशों में प्रस्तुति दे चुका फ्यूज़न बैंड ‘द तापी प्रोजेक्ट’ सोमवार को चंडीगढ़ में करेगा परफॉर्म

11 January, 2026, 4:19 pm

 

चंडीगढ़: लोक परंपराओं और आधुनिक संगीत के बीच की रेखा को धुंधला करने वाला भारत का चर्चित फ्यूज़न बैंड ‘द तापी प्रोजेक्ट’ मानता है कि संगीत को किसी एक जॉनर में बांधना उसकी आत्मा के साथ अन्याय है। बैंड का कहना है कि उनका संगीत उनके आसपास के सामाजिक वातावरण और यथार्थ का प्रतिबिंब है, जो स्वाभाविक रूप से आकार लेता है।

सूरत स्थित यह बैंड, जो अब तक 30 से अधिक देशों में प्रस्तुति दे चुका है, 12 जनवरी को शाम 5:30 बजे पंजाब कला भवन, चंडीगढ़ में अपने संगीत का जादू बिखेरेगा। यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन (IDC) की पहल ‘थिंकर्स कलेक्टिव’ के आमंत्रण पर आयोजित किया जा रहा है।

बैंड में योगेंद्र सनियावाला (वाद्य यंत्र, गीत लेखन), स्वाति मिनाक्षी (मुख्य गायिका), गौरव कपाड़िया (ड्रम्स) और बिजू नांबियार शामिल हैं।

मुख्य गायिका स्वाति मिनाक्षी कहती हैं,

“तापी के शब्द और संगीत हमारे आसपास की परिस्थितियों और जीवन के यथार्थ को दर्शाते हैं। यह एक ऐसा आईना है, जिसमें कोई भी खुद को देख सकता है।”

परंपरा को नए ढंग से प्रस्तुत करने के लिए पहचाने जाने वाले योगेंद्र सनियावाला मानते हैं कि परंपराएं पहचान की लौ होती हैं।

“हम एक रोशनी से दूसरी रोशनी की ओर बढ़ते रहते हैं और वहीं से हमारी पहचान बनती है।”

ड्रमर गौरव कपाड़िया के अनुसार, बैंड कभी भी श्रोताओं को कोई तय अनुभव देने की कोशिश नहीं करता।

“हम चाहते हैं कि हर श्रोता अपने हिसाब से संगीत को महसूस करे और अपनी कहानी लेकर जाए। यही किसी भी कला की असली ताकत है, जो तात्कालिक मनोरंजन से आगे जाती है।”

जैज़, रॉक, फंक, फोक और स्पोकन वर्ड जैसे विभिन्न संगीत शैलियों को मिलाकर प्रस्तुति देने वाला यह बैंड खुद को एक ‘यात्री’ मानता है।
बिजू नांबियार कहते हैं,

“हम अनुभवों को आत्मसात करने आए हैं, क्योंकि वही हमारे संगीत की नींव बनते हैं।”

IDC के चेयरपर्सन डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि ‘थिंकर्स कलेक्टिव’ के लिए ऐसे बैंड को आमंत्रित करना जरूरी था, जिसकी जड़ें समाज में हों।

“इनके गीत समाज, मानवीय अनुभवों, जलवायु और आम लोगों की समस्याओं पर बात करते हैं। ये कोई विशेषाधिकार प्राप्त या सजावटी बैंड नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाइयों को अपनी शैली में प्रस्तुत करने वाले संवेदनशील कलाकार हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये प्रयोग से नहीं डरते और सुरक्षित रास्ता नहीं चुनते।”