राजस्थान से सटे मध्यप्रदेश के टाइगर रिज़र्व बन रहे हैं वाइल्डलाइफ टूरिज़्म के नए आकर्षण

23 January, 2026, 10:27 am

 

भोपाल (मध्यप्रदेश):
मध्यप्रदेश एक बार फिर अपने सशक्त वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण सुर्खियों में है। राज्य के सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व से 27 भारतीय बाइसन (गौर) को आगामी दिनों में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य बांधवगढ़ में गौरों की जीन पूल को सशक्त बनाना और जैव विविधता को और समृद्ध करना है।
सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि कुल 50 गौरों को बांधवगढ़ ले जाने की योजना बनाई गई थी। इनमें से 23 गौरों को पिछले वर्ष सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया जा चुका है, जबकि शेष 27 को 26 जनवरी के आसपास स्थानांतरित किया जाएगा।
इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सुरक्षित रूप से पूरा करने के लिए 11 जनवरी को रिज़र्व स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गौर जैसे भारी और शक्तिशाली वन्यजीवों को पकड़ने और वाहन में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है। इसके लिए पहले से उन क्षेत्रों की मैपिंग कर ली गई है, जहां गौरों की सक्रिय उपस्थिति है।

तेंदुए की मौजूदगी से हलचल
इसी बीच, बैतूल जिले के भौरा गांव में एक तेंदुए की गतिविधियों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की टीम पिछले कई दिनों से इलाके में डेरा डाले हुए है। पिंजरे और चारे की मदद से तेंदुए को पकड़ने के प्रयास सफल नहीं हो सके हैं, जिसके बाद अब ट्रैंकुलाइजेशन (बेहोश कर पकड़ने) की रणनीति अपनाई जा रही है। इस अभियान में चार प्रशिक्षित हाथियों को भी शामिल किया जाएगा।

राजस्थान–मध्यप्रदेश: वाइल्डलाइफ टूरिज़्म की साझा पहचान
मध्यप्रदेश और राजस्थान, दोनों ही राज्य भारत के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन गंतव्य के रूप में जाने जाते हैं। जहां राजस्थान रणथंभौर और सरिस्का जैसे अभयारण्यों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं मध्यप्रदेश को “टाइगर स्टेट ऑफ इंडिया” कहा जाता है।
जयपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर जैसे शहरों से सतपुड़ा, बांधवगढ़, कान्हा और पेंच तक की बेहतर सड़क व रेल कनेक्टिविटी, पर्यटकों को एक ही यात्रा में दोनों राज्यों के जंगलों का अनुभव लेने का अवसर देती है।

पर्यटन के लिए आमंत्रण
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, इस तरह के संरक्षण प्रयास न केवल वन्यजीवों के लिए लाभकारी हैं, बल्कि इको-टूरिज़्म और नेचर-बेस्ड ट्रैवल को भी बढ़ावा देते हैं। राजस्थान के पर्यटक मध्यप्रदेश के घने जंगलों, रोमांचक जंगल सफारी, और जिम्मेदार पर्यटन अनुभवों का आनंद लेकर एक अलग ही प्राकृतिक संसार से जुड़ सकते हैं।
मध्यप्रदेश के जंगल—जहां संरक्षण, रोमांच और प्रकृति एक साथ जीवंत होते हैं।