भारत–अमेरिका व्यापार समझौता: विश्व की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के बीच एक ऐतिहासिक कदम

3 February, 2026, 12:45 pm

भारत–अमेरिका व्यापार समझौता: विश्व की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के बीच एक ऐतिहासिक कदम

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता विश्व की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण और निर्णायक नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब है। उनके नेतृत्व में भारत आज एक आत्मविश्वासी, विश्वसनीय और अपरिहार्य वैश्विक आर्थिक भागीदार के रूप में उभरा है, यह बात भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कही।

श्री खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा देगा, भारत में निवेश को प्रोत्साहित करेगा तथा विशेष रूप से एमएसएमई, स्टार्टअप्स और विनिर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेगा। यह मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल जैसी पहलों को मजबूती प्रदान करते हुए भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजारों तक व्यापक पहुँच दिलाएगा और घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेगा।

उन्होंने कहा कि इस व्यापार समझौते से विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र एवं परिधान, रत्न एवं आभूषण, कृषि उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा। भारतीय निर्यातकों, व्यापारियों और उद्यमियों को व्यापार अवरोधों में कमी, बेहतर बाजार पहुँच और प्रौद्योगिकी सहयोग का सीधा लाभ प्राप्त होगा।

श्री खंडेलवाल ने आगे कहा कि इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ावा देना है, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी और सतत आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

कुल मिलाकर, भारत–अमेरिका व्यापार समझौता केवल एक व्यावसायिक समझौता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी है, जो भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा को तेज करेगी और देश को वैश्विक विनिर्माण एवं व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को सुदृढ़ करता है, जिसके अंतर्गत भारत को वैश्विक आर्थिक विकास का इंजन बनाते हुए देश के भीतर समावेशी विकास और समृद्धि सुनिश्चित की जा रही है।