राष्ट्रविरोधी कुकृत्यों से जेएनयू की छवि धूमिल करना चाहते थे वामपंथी

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जेएनयू इकाई 9 फरवरी 2016 की उस शर्मनाक घटना के 10 वर्ष पूरे होने पर वामपंथी विचारधारा द्वारा प्रायोजित 'देशद्रोह के मॉडल' की कड़े शब्दों में निंदा करती है। जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को बदनाम करने की साजिश साबरमती के ढाबा से शुरू हुई थी, जिसे आज भी कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। 9 फरवरी 2016 को कैंपस में 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' और 'अफजल हम शर्मिंदा हैं',जैसे जो घिनौने नारे लगे, वे केवल चंद छात्रों की आवाज नहीं थे, बल्कि वह एक गहरी वामपंथी साजिश का हिस्सा थे। वामपंथियों ने हमेशा शिक्षा के मंदिर को अलगाववाद और अराजकता के अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया है। जेएनयू की जो असली पहचान शोध और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए है, उसे इन मुट्ठी भर लोगों ने 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के ठप्पे में तब्दील कर दिया है, जिसके विरुद्ध अभाविप का संघर्ष निरंतर जारी है।
अभाविप इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त करती है कि एक दशक बीत जाने के बाद भी जेएनयू प्रशासन ने उन दोषियों पर कोई ठोस या स्थायी दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की है। प्रशासन का सुस्त रवैया और जाँच समितियों की फाइलों का धूल फाँकना यह दर्शाता है कि संस्थान के भीतर बैठे कुछ लोग अब भी इन अराजक तत्वों को मूक संरक्षण दे रहे हैं। प्रशासन की इसी कायरतापूर्ण चुप्पी और ढुलमुल रवैये के कारण आज भी कैंपस की दीवारों पर देशविरोधी और नफरती नारे लिखने की हिम्मत की जाती है। हाल के दिनों में हमने देखा है कि किस प्रकार प्रशासन और वामपंथी संगठनों के बीच एक 'अपवित्र गठजोड़' पनप रहा है, जहाँ एक ओर राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं पर भारी जुर्माने आदेश थोपे जाते हैं, वहीं दूसरी ओर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों को प्रशासनिक ढिलाई का लाभ मिलता है।
अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि जेएनयू की अकादमिक गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले किसी भी संगठन या व्यक्ति को भविष्य में कोई संरक्षण न मिले। प्रशासन को अपनी पक्षपाती कार्यप्रणाली को त्यागकर जेएनयू के सामान्य छात्रों के लिए एक सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण निर्मित करना होगा, जहाँ राष्ट्रवाद सर्वोपरि हो और किसी भी प्रकार की 'तोड़-फोड़' या अराजकता के लिए कोई स्थान न हो।
अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि हम जेएनयू की धरती पर किसी भी कीमत पर 'भारत विरोधी एजेंडा' सफल नहीं होने देंगे। हम जेएनयू को वामपंथी चंगुल से मुक्त कराकर इसे 'पुनर्निर्माण' और 'राष्ट्रवाद' की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अंतिम राष्ट्रविरोधी चेहरा बेनकाब नहीं हो जाता और जेएनयू का गौरव पुनः स्थापित नहीं हो जाता।




