सरकार ने हीट-रेज़िलिएंट शहरी नियोजन को दी गति

नई दिल्ली | 9 फरवरी 2026
जलवायु-संवेदनशील और भविष्य के अनुरूप शहरी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने सदन में बढ़ते शहरी ताप तनाव का विषय उठाया और नागरिकों की सुरक्षा तथा शहरों को अत्यधिक गर्मी से सुरक्षित बनाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मांगी।
अनस्टार्ड प्रश्न के उत्तर में सरकार ने सदन को अवगत कराया कि शहरी हीट स्ट्रेस से निपटने के लिए एक व्यापक, विज्ञान-आधारित ढांचा पहले से लागू है। इसके तहत नियमित जलवायु और हीटवेव आकलन, मौसमी, मासिक और दीर्घावधि हीटवेव पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय हीटवेव संवेदनशीलता एटलस तथा हॉट वेदर हैज़र्ड मैप्स तैयार किए गए हैं। प्रत्येक ग्रीष्मकाल से पूर्व राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर हीटवेव तैयारियों की बैठकें भी आयोजित की जाती हैं।
सरकार ने बताया कि वर्ष 2019 से ही हीटवेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश लागू हैं। इसके परिणामस्वरूप देशभर में 23 राज्यों, 195 जिलों और 64 शहरों में हीट एक्शन प्लान तैयार किए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य अत्यधिक गर्मी के दौरान संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
शहरी नियोजन के विषय में सरकार ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों के अधीन है, केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी सहायता के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर जारी विभिन्न दिशानिर्देशों में शहरी हरित क्षेत्रों और अर्बन फॉरेस्ट का विस्तार, जल निकायों का संरक्षण, रिफ्लेक्टिव और क्लाइमेट-रेस्पॉन्सिव निर्माण सामग्री का उपयोग, सड़कों की उचित दिशा-निर्धारण, ग्रीन रूफ्स और सेमी-पर्वियस सतहों को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि हीट मिटीगेशन और जलवायु लचीलापन प्रमुख शहरी योजनाओं में व्यवस्थित रूप से जोड़ा जा रहा है। AMRUT के अंतर्गत 2,497 पार्क परियोजनाएं विकसित की गई हैं, जिनकी लागत ₹1,576.45 करोड़ है और जिनसे 5,277 एकड़ से अधिक हरित क्षेत्र जोड़ा गया है। AMRUT 2.0 के तहत 1,665 पार्क परियोजनाएं (₹1,117.48 करोड़) और 3,016 जल निकाय पुनर्जीवन परियोजनाएं (₹6,223.48 करोड़) स्वीकृत की गई हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत ग्रीन कॉरिडोर, रूफटॉप गार्डन और कूल पेवमेंट जैसी तकनीकों को अपनाया गया है, जबकि PMAY-Urban के तहत जलवायु-संवेदनशील और ऊर्जा-कुशल आवास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, राज्यों को ब्लू और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्बन फॉरेस्ट, स्पॉन्ज सिटी प्लानिंग और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़े शहरी सुधारों के लिए विशेष प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत माइक्रो फॉरेस्ट और नगर वन जैसी पहलें भी शहरी ताप तनाव को कम करने में सहायक हैं।
सरकार के विस्तृत उत्तर का स्वागत करते हुए सांसद कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि भारत शहरी नियोजन में जलवायु विज्ञान को शामिल करने की दिशा में सही और सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “नीतिगत ढांचा, डेटा और स्पष्ट दिशा मौजूद है। अब आवश्यकता है कि इन प्रयासों को तेज़ी और व्यापक स्तर पर ज़मीन पर उतारा जाए, ताकि नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।”
श्री शर्मा ने दोहराया कि हीट-रेज़िलिएंट शहर सार्वजनिक स्वास्थ्य, उत्पादकता और जीवन गुणवत्ता के लिए अनिवार्य हैं और यह सरकार के सतत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार भारत के विज़न के अनुरूप है।




