आरबीआई चंडीगढ़ द्वारा वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का शुभारंभ

9 February, 2026, 11:06 pm



 चंडीगढ़ , 9 फरवरी: भारतीय रिज़र्व बैंक वर्ष 2016 से प्रत्येक वर्ष किसी एक विशेष विषय के अंतर्गत वित्तीय साक्षरता सप्ताह का आयोजन करता आ रहा है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के विभिन्न वर्गों को लक्षित करते हुए वित्तीय जागरूकता फैलाना है। वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का आयोजन 9 से 13 फरवरी, 2026 तक किया जा रहा है, जो इस पहल का 11वाँ संस्करण है। वित्तीय साक्षरता सप्ताह मनाने का मुख्य उद्देश्य केंद्रित अभियानों के माध्यम से लोगों को महत्वपूर्ण वित्तीय विषयों के प्रति जागरूक करना है।

चंडीगढ़ में वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का उद्घाटन श्री विवेक श्रीवास्तव, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिज़र्व बैंक, चंडीगढ़ द्वारा किया गया। इस वर्ष की थीम है “केवाईसी – सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम / योर फर्स्ट  स्टेप टू सेफ बैंकिंग ”। इसके अंतर्गत उप-थीम्स में अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) की मूल बातें, सेंट्रल केवाईसी रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर ) तथा खाता स्वच्छता एवं अनुशासन शामिल हैं। इस थीम का अभिप्राय सुरक्षित और संरक्षित बैंकिंग की नींव के रूप में केवाईसी के महत्व को उजागर करना है।

केवाईसी  की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए श्री विवेक श्रीवास्तव ने इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियामक एवं सुरक्षा उपाय बताया। उन्होंने सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री (सीकेवाईसी) की भूमिका तथा साइबर धोखाधड़ी और मनी म्यूल गतिविधियों के विरुद्ध निरंतर सतर्कता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद सीकेवाईसीआर प्रणाली अब स्थिर हो चुकी है और यह बैंकों के बीच वैध एवं सत्यापित ग्राहक जानकारी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सप्ताह के दौरान, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकों एवं अन्य हितधारकों के सहयोग से देश भर में जागरूकता कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों का आयोजन करेगा। इन पहलों के अंतर्गत चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय से एक मोबाइल वैन को रवाना किया गया, जिसमें वित्तीय साक्षरता से संबंधित प्रमुख संदेश प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सुरक्षित और जिम्मेदार बैंकिंग प्रथाओं के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए शहर के प्रमुख स्थलों पर जागरूकता होर्डिंग्स भी लगाए गए हैं। इन पहलों को वर्ष भर जारी रखा जाएगा ताकि इसका दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।