म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2026: ‘रेकिंग-बॉल पॉलिटिक्स’ से वैश्विक व्यवस्था पर खतरे की चेतावनी

बर्लिन/म्यूनिख। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference – MSC) से पहले जारी 2026 की सुरक्षा रिपोर्ट में वैश्विक राजनीति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां संस्थाओं में सुधार की बजाय उन्हें तोड़ने वाली राजनीति — जिसे विशेषज्ञों ने “wrecking-ball politics” कहा है — तेजी से प्रभावी हो रही है।
वैश्विक व्यवस्था पर संकट का संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई पश्चिमी देशों में ऐसी राजनीतिक ताकतें मजबूत हो रही हैं जो क्रमिक सुधार के बजाय मौजूदा संस्थागत ढांचे को कमजोर करने या खत्म करने की राजनीति कर रही हैं। रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को इस बदलाव का प्रमुख उदाहरण बताया गया है, हालांकि इसे केवल एक देश तक सीमित नहीं माना गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक नेतृत्व और संस्थागत व्यवस्था को अब बड़ी आबादी “यथास्थिति बनाए रखने वाले तंत्र” के रूप में देख रही है, जिससे राजनीतिक असंतोष और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है।
65 विश्व नेताओं की भागीदारी
इस वर्ष का म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन शुक्रवार से शुरू होगा, जिसमें लगभग 65 विश्व नेता, करीब 100 विदेश और रक्षा मंत्री, सैन्य अधिकारी तथा नीति-निर्माता शामिल होंगे। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज इस सम्मेलन में पहली बार शिरकत करेंगे।
1963 में शुरू हुआ यह सम्मेलन आज नाटो, ट्रांस-अटलांटिक संबंधों और पश्चिमी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था पर चर्चा का प्रमुख मंच बन चुका है।
भविष्य को लेकर बढ़ती निराशा
रिपोर्ट के तहत किए गए सर्वे में देशों के बीच भविष्य को लेकर दृष्टिकोण में बड़ा अंतर सामने आया है।
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चीन में 80% लोगों को भविष्य में सुधार की उम्मीद है।
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भारत में 61% उत्तरदाताओं ने सकारात्मक उम्मीद जताई।
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अमेरिका में यह आंकड़ा 31% रहा।
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यूरोप में उम्मीदें और कम दिखीं — इटली (22%), ब्रिटेन (20%), जर्मनी (13%) और फ्रांस (12%)।
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर “गहरी अनिश्चितता” का माहौल है, खासकर यूरोप में सुरक्षा, ट्रांस-अटलांटिक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ट्रंप की नीतियों पर वैश्विक मतभेद
सर्वे में अमेरिका सहित कई देशों में ट्रंप की नीतियों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई। अमेरिका में केवल 39% लोगों ने उनकी नीतियों को देश के लिए अच्छा बताया, जबकि लगभग आधे उत्तरदाताओं ने उन्हें नुकसानदायक माना। कनाडा और जर्मनी में उनके प्रति सबसे अधिक संदेह देखा गया।
वहीं अमेरिका के बाहर ब्राजील, भारत और चीन में ट्रंप की नीतियों को अपेक्षाकृत अधिक समर्थन मिला।
वॉशिंगटन पर निर्भरता कम करने की सलाह
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने वाले देशों को अधिक संगठित होकर अपनी सामरिक और आर्थिक क्षमता बढ़ानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जो देश केवल दर्शक बने रहेंगे, वे महाशक्तियों की राजनीति के दबाव में आ सकते हैं।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सरकारों को यह साबित करना होगा कि ठोस सुधार और सहयोग ही बेहतर परिणाम दे सकते हैं, न कि व्यापक स्तर पर संस्थागत विघटन की राजनीति।
Input -DPA




