AI IMPACT SUMMIT :300 से अधिक प्रदर्शक और 30 देशों की भागीदारी

भारत में आयोजित होने जा रहा ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर वैश्विक विमर्श का एक प्रमुख मंच बनेगा। यह समिट भारत में एआई के विकास को नई दिशा देने के साथ-साथ इसके जिम्मेदार, समावेशी और पर्यावरण-संवेदनशील उपयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 तीन मूलभूत स्तंभों या ‘सूत्रों’ पर आधारित होगा। पहला सूत्र जनता है, जिसके तहत एआई को मानवता की सेवा में लाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिल सकें और समावेशिता को बढ़ावा दिया जा सके।
दूसरा सूत्र प्लैनेट (ग्रह) है, जिसमें एआई नवाचारों को पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई का विकास पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और टिकाऊ हो। तीसरा सूत्र प्रगति है, जिसके माध्यम से एआई के लाभों को समान रूप से साझा करने पर बल दिया जाएगा, ताकि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास भी सुनिश्चित किया जा सके।
इन तीन सूत्रों पर आधारित यह शिखर सम्मेलन सात आपस में जुड़े विषय क्षेत्रों के इर्द-गिर्द आयोजित किया जाएगा, जिन्हें ‘चक्र’ कहा गया है। ये चक्र नीति और वास्तविक दुनिया में एआई के उपयोग को ठोस रूप देने का काम करेंगे। इन कार्य समूहों के माध्यम से 100 से अधिक देशों को जिम्मेदार और समावेशी एआई के भविष्य को आकार देने की प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
पहला चक्र मानव पूंजी से जुड़ा होगा, जिसमें एआई के लिए समावेशी कौशल और शिक्षा प्रणाली विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी को डिजिटल युग के लिए तैयार किया जा सके। दूसरा चक्र समावेशन पर केंद्रित होगा, जिसके तहत एआई का उपयोग समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाने और सभी नागरिकों तक इसके लाभ पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
तीसरा चक्र सुरक्षित और विश्वसनीय एआई का होगा। इसके अंतर्गत एआई के लिए जिम्मेदार सुरक्षा मानकों और गवर्नेंस फ्रेमवर्क पर चर्चा की जाएगी, ताकि सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर इसका सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित हो सके।
चौथा चक्र लचीलापन, नवाचार और दक्षता से संबंधित होगा, जिसमें एआई के जरिए पर्यावरणीय और संसाधन संबंधी चुनौतियों के समाधान पर काम किया जाएगा। पांचवां चक्र विज्ञान पर केंद्रित रहेगा, जहां एआई का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, वैश्विक स्वास्थ्य, कृषि और जलवायु समाधान को आगे बढ़ाने के लिए किया जाएगा। छठा चक्र एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण होगा, जिसके तहत छोटे व्यवसायों और शोध संस्थानों समेत सभी को एआई संसाधनों तक समान पहुंच देने पर जोर दिया जाएगा।
सातवां और अंतिम चक्र एआई से आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य एआई का उपयोग आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक सुधार के लिए करना है, ताकि इसके लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकें।
समिट के दौरान 300 से अधिक प्रदर्शक और 30 देशों से भागीदार हिस्सा लेंगे। इन सात चक्रों पर होने वाली चर्चाएं भारत के लिए एआई क्षेत्र में एक नई दिशा तय कर सकती हैं। भारत इस शिखर सम्मेलन के जरिए वैश्विक एआई हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है और स्थानीय चुनौतियों के समाधान के साथ वैश्विक एआई मानकों को आकार देने की मंशा रखता है।
इनपुट- D D NEWS




