नीति, प्रदर्शन और उद्देश्य”: सांसद कार्तिकेय शर्मा ने बजट 2026-27 को विकसित भारत का ब्लूप्रिंट बताया

नई दिल्ली:
राज्यसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान सांसद श्री कार्तिकेय शर्मा ने प्रभावशाली और तथ्याधारित हस्तक्षेप करते हुए बजट का सशक्त समर्थन किया तथा इसे विकसित भारत 2047 की दिशा में एक संरचनात्मक रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वार्षिक लेखा-जोखा नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक शक्ति, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का ठोस खाका है।
अपने वक्तव्य की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा,
“नज़र को बदलो तो नज़ारे बदल जाते हैं,
सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते हैं,”
और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी द्वारा प्रस्तुत 9वें बजट को भारत की आर्थिक यात्रा का निर्णायक क्षण बताया।
“डेड इकोनॉमी” से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक
विपक्ष के आरोपों का उत्तर देते हुए श्री शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, जो 1970 के दशक में 15वें स्थान पर पहुंच गया और 2004 से 2014 के बीच 10वें स्थान पर स्थिर रहा।
उन्होंने कहा, “सिर्फ 12 वर्षों में भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि संयोग नहीं, बल्कि सुधार-आधारित और नीति-निर्देशित शासन का परिणाम है।
₹12 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय: इंफ्रास्ट्रक्चर का नया विस्तार
उन्होंने बताया कि 2013-14 की तुलना में पूंजीगत व्यय 4.5 गुना बढ़कर ₹12 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। 2014 में जहां राजमार्ग निर्माण की गति 12 किमी प्रतिदिन थी, आज यह बढ़कर 34 किमी प्रतिदिन हो चुकी है।
उन्होंने कहा, “ये केवल सड़कें नहीं, बल्कि विकसित भारत की आर्थिक धमनियां हैं।”
मेक इन इंडिया: उपलब्धियों के साथ
मेक इन इंडिया पर उठे सवालों का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण 2014 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹10 लाख करोड़ हो गया है और भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।
रक्षा उत्पादन ₹45,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात ₹23,000 करोड़ को पार कर चुका है।
भारत ने 2025 में $800 बिलियन का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया, जो 2013 के $400 बिलियन से दोगुना है।
₹4 लाख करोड़ कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए
भारत को कृषि प्रधान राष्ट्र बताते हुए श्री शर्मा ने लगभग ₹4 लाख करोड़ के कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रावधान को ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने हरियाणा का उल्लेख करते हुए कहा,
“दूध-दही का खाणा, सबसे अच्छा हरियाणा,”
और बताया कि भारत आज विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। अमूल जैसे सहकारी मॉडल जनभागीदारी आधारित विकास के उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा 24 फसलों पर MSP प्रदान करता है, जो केंद्र और राज्य के प्रभावी समन्वय का प्रमाण है। क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी और पशु चिकित्सा कॉलेजों का विस्तार डेयरी किसानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
उन्होंने 16वें वित्त आयोग के तहत हरियाणा को ₹20,772 करोड़ के टैक्स डिवोल्यूशन और अन्य निवेशों के लिए केंद्र सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
स्वास्थ्य: किफायती और जन-केंद्रित मॉडल
अमेरिका से की जा रही तुलना को भ्रामक बताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि अमेरिका विश्व की सबसे महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था वाला देश है, जबकि भारत दुनिया के सबसे किफायती स्वास्थ्य मॉडलों में से एक है।
क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर भारत में ₹1.2–1.8 लाख में होने वाली हृदय बायपास सर्जरी अमेरिका में $150,000 तक खर्च करा सकती है। भारत में ₹1,000–2,000 में होने वाला MRI अमेरिका में लगभग $3,000 का होता है।
उन्होंने कहा कि भारत कम लागत के साथ व्यापक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है, जो इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और मानवीय मॉडल बनाता है।
इसी क्रम में उन्होंने अपनी एआई-सक्षम “नमो शक्ति रथ” पहल का उल्लेख किया, जो बड़े स्तर पर महिलाओं की स्तन कैंसर जांच कर रहा है। उन्होंने इसे ‘मेक इन इंडिया’ तकनीक के माध्यम से जमीनी स्तर तक उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का उदाहरण बताया।
एआई, सेमीकंडक्टर और भविष्य की दिशा
उन्होंने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत ₹40,000 करोड़ के प्रावधान और 2047 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहन देने वाली कर रियायतों का उल्लेख किया।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल 2025 के अनुसार भारत विश्व की तीसरी सबसे प्रतिस्पर्धी एआई अर्थव्यवस्था बन चुका है।
भारत शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है, 100 से अधिक यूनिकॉर्न बना चुका है और UPI के माध्यम से अमेरिका, चीन और यूरोप के संयुक्त आंकड़ों से अधिक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रोसेस करता है।
उन्होंने हरियाणा द्वारा स्थापित “डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर अफेयर्स” को सहकारी संघवाद और भविष्य-दृष्टि का उदाहरण बताया।
राष्ट्र राजनीति से ऊपर
अपने वक्तव्य के समापन पर श्री कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि बजट 2026-27 किसी एक वर्ष का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 की यात्रा का संगठित मार्गदर्शक दस्तावेज है।
“जब गांव विकसित होंगे और शहर सशक्त होंगे, तभी भारत आत्मनिर्भर और विकसित बनेगा,” उन्होंने कहा और राष्ट्रीय हित में बजट का समर्थन किया।
यह हस्तक्षेप श्री शर्मा को एक दूरदर्शी, तकनीक-समझ रखने वाले और नीति-केंद्रित सांसद के रूप में स्थापित करता है, जो व्यापक आर्थिक दृष्टि, डेयरी एवं कृषि शक्ति, भविष्य की तकनीक और जमीनी स्वास्थ्य नवाचार को एक समेकित विकास दृष्टिकोण में जोड़ते हैं।




