प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सत्ता बचाने की कीमत राष्ट्रीय हित से चुकाई है

नई दिल्ली, 11 फरवरी
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते को पूरी तरह आत्मसमर्पण बताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने भारत माता को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के जरिए 140 करोड़ भारतीयों का भविष्य गिरवी रख दिया गया है। इससे युवाओं के रोजगार, किसानों की फसल और ऊर्जा सुरक्षा को दांव पर लगा दिया गया है। उन्होंने एपस्टीन फाइल्स और अमेरिका में अडानी पर चल रहे केस का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सत्ता बचाने की कीमत राष्ट्रीय हित से चुकाई है। उन्होंने कहा कि कोई प्रधानमंत्री बिना भारी दबाव के ऐसे घुटने नहीं टेकता और यह समझौता बराबरी का नहीं, बल्कि मजबूरी का है।
संसद में बोलते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने दबाव में आकर देश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल्स के खुलासों के दबाव में और अमेरिका में चल रहे केस में अडानी यानी भाजपा के वित्तीय नेटवर्क को बचाने के लिए मोदी सरकार ने सरेंडर कर दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रधानमंत्री सामान्य परिस्थितियों में ऐसा समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योगपति अनिल अंबानी आपराधिक मामलों के बावजूद जेल में इसलिए नहीं हैं क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में आया है और उन्हें एपस्टीन से मिलवाने वाले केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मार्शल आर्ट में जब किसी पर चोक लगाया जाता है, तो उसकी आंखों में डर दिखाई देता है। उसी तरह नरेंद्र मोदी की आंखों में भी डर दिखता है और वे आंख में आंख मिलाकर बात नहीं कर पाते।
नेता विपक्ष ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए आगे कहा कि बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जगह एआई ले लेगा। उन्होंने कहा कि एआई का असली ईंधन डेटा है और भारत के पास उसकी 140 करोड़ जनता के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा डेटा पूल है, जो 21वीं सदी की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है। उन्होंने किसानों के हितों से समझौता होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहली बार भारतीय इतिहास में हमारे किसान तूफ़ान का सामना कर रहे हैं। सरकार ने गरीब किसानों को कुचलने के लिए दरवाजा खोल दिया है। अब अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में आएंगे, जिससे छोटे किसानों पर असर पड़ेगा।
साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समझौते से हमारी ऊर्जा सुरक्षा कमजोर हुई है। अब अमेरिका तय करेगा कि भारत किससे तेल खरीदे। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण मानता है कि दुनिया अस्थिरता और भू-राजनीतिक संघर्ष के दौर में प्रवेश कर रही है। पूरी दुनिया में ऊर्जा और वित्त को हथियार बनाया जा रहा है। जब अमेरिका कहता है कि हम किसी देश से तेल नहीं खरीद सकते तो इसका मतलब है कि ऊर्जा का हथियारीकरण हो गया है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि डॉलर कमज़ोर हो रहा है, अमेरिका को अपना डॉलर बचाने के लिए भारतीय डेटा की जरूरत है। वहीं मोदी सरकार ने भारतीय डेटा की कीमत को दरकिनार करते हुए डिजिटल व्यापार नियमों पर नियंत्रण छोड़ दिया है, डेटा लोकलाइजेशन हटाया है और अमेरिका तक डेटा के फ्री फ्लो की इजाजत दी है। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल संप्रभुता कमजोर करने वाला कदम बताते हुए कहा कि भारत की सबसे मूल्यवान संपत्ति समर्पित कर दी गई है। यह सुधार नहीं, पूर्ण आत्मसमर्पण है। यह केवल एक प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि भारतीयों के भविष्य का आत्मसमर्पण है।
राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ तीन प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। अमेरिकी आयात 46 बिलियन डॉलर से बढ़कर 146 बिलियन डॉलर होने वाला है। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते के बाद अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क संरचना में बदलाव से भारतीय उद्योगों, विशेषकर टेक्सटाइल क्षेत्र को नुकसान होगा। टेक्सटाइल की रेस में भारत 18 प्रतिशत टैरिफ की बेड़ियों में दौड़ेगा और बांग्लादेश शून्य प्रतिशत टैरिफ के खुले मैदान में। उन्होंने कहा कि ट्रंप की शर्तों के सामने प्रधानमंत्री का सरेंडर भारतीय टेक्सटाइल के लिए मौत का फरमान है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर इंडिया गठबंधन (सरकार के रुप में) राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत कर रहा होता, तो हम कहते कि भारतीय डेटा सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है। अगर अमेरिका इस डेटा तक पहुंच चाहता है, तो उसे भारत के साथ बराबरी के आधार पर बातचीत करनी होगी। हम यह भी स्पष्ट करते कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करेगा और अपने किसानों की सुरक्षा करेगा, ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका अपने किसानों की रक्षा करता है।




