‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में महिला समृद्धि का संकल्प:विजया रहाटकर

16 February, 2026, 11:31 pm

 

नई दिल्ली, 16 फरवरी: तेजी से बदलते प्रौद्योगिकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और उद्योग जगत का केंद्रीय आधार बन चुका है। आने वाले समय में ‘एआई’ के कारण रोजगार के अवसरों और उनके स्वरूप में व्यापक परिवर्तन होगा। महिलाओं को इस तकनीक की केवल ‘उपयोगकर्ता’ न रहकर शोधकर्ता और सृजनकर्ता बनकर परिवर्तन का नेतृत्व करना चाहिए। यदि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को ‘एआई’ से जोड़ा जाए तो उनका सतत विकास संभव है, ऐसा आशावाद विजया रहाटकर ने व्यक्त किया।

दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के अंतर्गत राष्ट्रीय महिला आयोग, अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ और संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण व अनुसंधान संस्थान (यूनिटार) के संयुक्त तत्वावधान में ‘एआई और आर्थिक शक्ति – महिला नेतृत्व में समृद्धि की रूपरेखा’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। समापन भाषण में श्रीमती रहाटकर ने यह विचार व्यक्त किए।

मंच पर यूनिटार की समृद्धि विभाग की निदेशक मिहोको कुमामोटो, अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय निदेशक अत्सुको ओकुदा, सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव तथा महानिदेशक ब्रिजेश सिंह तथा संगीतकार-निर्माता कार्तिक शाह उपस्थित थे।

श्रीमती रहाटकर ने कहा कि यह चर्चा केवल संवाद नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। भारतीय महिलाओं ने सदैव परिवर्तन का नेतृत्व किया है और ‘एआई’ जैसी नई तकनीक में भी वे पीछे नहीं रहेंगी। इसके लिए उन्हें उचित प्रशिक्षण और आवश्यक इकोसिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा। महिलाओं की केवल भागीदारी नहीं, बल्कि तकनीक पर स्वामित्व आवश्यक है। इसके लिए ‘एआई साक्षरता’ अत्यंत जरूरी है, जिसमें डेटा संरक्षण, डिजिटल नैतिकता और साइबर सुरक्षा की गहरी समझ शामिल है।

उन्होंने घोषणाओं के बजाय ठोस क्रियान्वयन पर बल देते हुए सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने का आह्वान किया तथा आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय महिला आयोग इस दिशा में सक्रिय प्रयास करेगा।

पीड़ितों को नोडल अधिकारियों से शिकायत की सुविधा
– प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह

सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह ने डिजिटल खतरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई प्रणालियाँ प्रायः पुरुष-प्रधान डेटा पर आधारित होने के कारण संवेदनशीलता, न्याय और समानता में कमी दिखाई देती है। यह प्रणाली ‘हाइपर-ऑप्टिमाइजेशन’ पर केंद्रित है, जिसका नकारात्मक प्रभाव महिलाओं की सुरक्षा पर पड़ता है।

उन्होंने बताया कि ‘डीपफेक’ तकनीक के 91 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। सोशल मीडिया कंपनियों को ‘सेफ हार्बर’ नियमों का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचना नहीं चाहिए। प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है और जहां यह नहीं होती, वहां सरकार का हस्तक्षेप जरूरी है।

भारत में 2021 के नियमों के तहत पीड़ितों को नोडल अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है तथा निर्धारित समय सीमा में आपत्तिजनक सामग्री हटाना कंपनियों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने एआई-निर्मित छवियों पर अनिवार्य ‘वॉटरमार्क’ लागू करने की आवश्यकता भी व्यक्त की।

यूनिटार की मिहोको कुमामोटो ने क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे महिलाओं को एआई आधारित वैश्विक अवसरों का लाभ मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग और अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे जो स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करें और अन्य देशों के लिए भी मॉडल बनें।

आईटीयू की अत्सुको ओकुदा ने द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में डिजिटल समावेशन बढ़ाने और डिजिटल विभाजन कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत को एआई नवाचार को महिलाओं के वास्तविक आर्थिक सशक्तिकरण में परिवर्तित करने के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने की पहल करनी चाहिए।

एआई संगीत निर्माता कार्तिक शाह ने रचनात्मक और डिजिटल अर्थव्यवस्था में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों पर प्रकाश डाला। सत्र की मॉडरेटर के रूप में मिहोको कुमामोटो ने जिम्मेदारी संभाली।
सत्र के प्रारंभ में महिला सशक्तिकरण पर आधारित एआई विषयक एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। संचालन सलोनी लखिया ने किया तथा आकांक्षा ने वक्ताओं का परिचय कराया।