पीयू में यू.एन टेक्नोलॉजी दूत का हुआ संबोधन 

16 February, 2026, 11:55 pm

 

चंडीगढ़, 16 फरवरी 2026:संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रौद्योगिकी दूत एवं अंडर सेक्रेटरी जनरल डॉ. अमनदीप सिंह गिल ने सोमवार को पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में आयोजित ‘पीयू कोलोक्वियम’ को संबोधित किया।

“टेक्नोलॉजीज़ प्रॉमिस एंड पेरिल: व्हाट रोल फॉर द यूनाइटेड नेशंस?” विषय पर यह व्याख्यान विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल (सीआईएल) भवन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग ने की। इस अवसर पर निदेशक रिसर्च एंड डेवलपमेंट, प्रो. मीनाक्षी गोयल, कोलोक्वियम समन्वयक प्रो. देश दीपक सिंह, निदेशक सीआईएल/एसएआईएफ/यूएसआईसी/यूसीआईएम प्रो. गौरव वर्मा सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

डॉ. गिल ने अपने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान डोमेन विशेषज्ञता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के साथ समन्वित कर तकनीकी विकास में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि छात्र जीवन से ही वे पीयू परिसर से प्रभावित रहे हैं। उनके अनुसार, पाठ्यक्रम सुधार, स्टार्ट-अप्स और व्यक्तिगत शोध योगदानों के माध्यम से विश्वविद्यालय भविष्य के तकनीकी नेतृत्व को सशक्त दिशा दे सकता है।

उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे एआई को केवल विशिष्ट तकनीकी संस्थानों तक सीमित न समझें। पीयू के भावी नेता विधि, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के ज्ञान को एआई अनुप्रयोगों के साथ जोड़कर राष्ट्रीय विकास के लिए उपयोगी और व्यवहारिक समाधान तैयार कर सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से जुड़े उन उभरते स्टार्ट-अप्स का भी उल्लेख किया जो कानून, बौद्धिक संपदा और एआई को जोड़ते हुए अंतर्विषयी नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

डॉ. गिल ने कहा कि शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे पाठ्यक्रम ढांचे में एआई साक्षरता को सभी विषयों में समाहित करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डोमेन विशेषज्ञों को बाहरी प्लेटफॉर्म्स पर पूर्ण निर्भरता के बजाय अपने स्वयं के एआई-सक्षम समाधान विकसित करने चाहिए।

तकनीक के व्यापक प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उभरती प्रौद्योगिक आर्थिक गतिविधिया सामाजिक संबंधों को तेजी से परिवर्तित कर रही हैं। जहां एआई उत्पादकता में वृद्धि और वैज्ञानिक खोजों में तेजी ला सकता है, वहीं कुछ निजी हाथों में डिजिटल शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण निर्भरता को बढ़ा सकता है और  राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए चुनौती उत्पन्न कर सकता है तथा मौलिक स्वतंत्रताओं के क्षरण का कारण बन सकता है।

उन्होंने एआई के लिए सुदृढ़ और प्रभावी नियामक ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि तकनीक के विकास के साथ-साथ आवश्यक प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपाय भी विकसित किए जाएंगे। राष्ट्रों के पारस्परिक सहयोग से साइबर अपराध, व्यापक निगरानी और अनियंत्रित डिजिटल स्पेस जैसे जोखिमों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए डॉ. गिल ने कहा कि बहुपक्षवाद पर दबाव अवश्य है, किन्तु उसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। यूनाइटेड नेशंस का मंच अंतरराष्ट्रीय कानून की दशकों पुरानी नींव पर आधारित है और एआई गवर्नेंस तथा क्षमता निर्माण के लिए संभावित ‘ग्लोबल फंड’ जैसे विषयों पर वैश्विक संवाद में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।