“भारत और मंगोलिया के सांस्कृतिक अंतःप्रवाह” का भव्य उद्घाटन

19 February, 2026, 8:50 am

संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के बृहत्तर भारत एवं क्षेत्र अध्ययन विभाग द्वारा भारत और मंगोलिया के राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “भारत और मंगोलिया के सांस्कृतिक अंतःप्रवाह” का भव्य उद्घाटन किया गया। मंगोलियाई चंद्र नववर्ष के अवसर पर शुरू हुए इस सम्मेलन में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि रहे।

शेखावत ने कहा कि यह सम्मेलन केवल अकादमिक अभ्यास नहीं, बल्कि साझा आध्यात्मिक और कलात्मक परंपराओं का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक आदान–प्रदान धर्म से आगे बढ़कर खगोलशास्त्र, पंचांग, चिकित्सा और साहित्य जैसे कई ज्ञान–क्षेत्रों तक फैला है। पारंपरिक मंगोलियाई चिकित्सा और पंचांग पद्धति में भारतीय ज्ञान परंपरा का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।

केंद्रीय मंत्री ने मंगोलियाई कंजूर के संरक्षण और डिजिटलीकरण को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती देने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि पांडुलिपि संरक्षण के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीक और कंजर्वेशन साइंस के समन्वय की आवश्यकता है, और यह सम्मेलन डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ के क्षेत्र में सहयोग का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

शेखावत ने कहा कि मंगोलिया में भारत को लंबे समय से पवित्र भूमि के रूप में देखा जाता है। उन्होंने 2015 की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत को मंगोलिया का आध्यात्मिक पड़ोसी बताए जाने का स्मरण किया और कहा कि ‘बृहत्तर भारत’ पहल के संदर्भ में मंगोलिया भारत के लिए विशेष महत्व रखता है।

केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि दोनों देशों का सहयोग सांस्कृतिक संबंधों से आगे बढ़कर शिक्षा, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहा है। उन्होंने साझा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के प्रयासों को साझेदारी का महत्वपूर्ण आयाम बताया।

सम्मेलन में विभिन्न देशों के 31 विद्वान भाग ले रहे हैं और दो दिनों में 75 शोधपत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसमें पुरातात्विक खोजों, मंदिर–स्तूप परंपरा, संस्कृत ग्रंथों, सांस्कृतिक कला शैलियों और साझा सभ्यतागत विरासत से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही है। यह आयोजन भारत–मंगोलिया के हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को नए दृष्टिकोण से समझने का मंच प्रदान करता है।

साभार -डीडी न्यूज