एआई के साथ भारत का भविष्य असाधारण होने वाला है: सुंदर पिचाई

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को संबोधित करते हुए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस दशक की सबसे निर्णायक ताकत बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक सहयोग के माध्यम से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि एआई के लाभ सभी तक पहुँचें।
उन्होंने कहा, “हम शानदार प्रगति और नई खोजों के युग की दहलीज पर हैं, लेकिन सर्वोत्तम परिणाम स्वतः सुनिश्चित नहीं हैं। हमें मिलकर काम करना होगा ताकि एआई के लाभ सभी तक और हर जगह पहुंचें।” उन्होंने तेज़ी से हो रहे नवाचार के साथ आने वाली जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।पिचाई ने तेज रफ्तार से हो रहे नवाचार के साथ आने वाली जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा, “हम अत्यधिक प्रगति और नई खोजों के युग के मुहाने पर खड़े हैं, लेकिन सर्वोत्तम परिणामों की गारंटी पहले से तय नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना होगा कि एआई के लाभ हर किसी के लिए और हर जगह उपलब्ध हों।”
द्विपक्षीय सहयोग के रणनीतिक महत्व पर बल देते हुए पिचाई ने कहा, “अमेरिका-भारत साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।” भारत के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि एआई के क्षेत्र में भारत की यात्रा असाधारण होगी और हम उत्पादों, विस्तार और अवसंरचना सहित पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इसका समर्थन कर रहे हैं।”
उन्होंने गूगल के प्रयासों को तीन प्रमुख स्तंभों-उत्पाद, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे में विभाजित किया। वास्तविक उपयोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से किसानों को समय पर मानसून पूर्वानुमान दिए जा रहे हैं और स्वास्थ्यकर्मियों को डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की जांच में मदद मिल रही है। साथ ही भारतीय भाषाओं में एआई टूल्स की पहुंच भी बढ़ाई जा रही है।
कौशल विकास के क्षेत्र को लेकर उन्होंने ऐलान किया कि “एआई स्किल हाउस के माध्यम से हम 1 करोड़ (10 मिलियन) भविष्य के भारतीय नेताओं को वैश्विक प्रगति के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान कर रहे हैं।” बुनियादी ढांचे के संदर्भ में पिचाई ने भारत में गूगल के 15 अरब डॉलर के निवेश का उल्लेख किया, जिसमें विशाखापट्टनम में स्थापित किया जा रहा एआई हब भी शामिल है। यह हब पूर्ण होने पर गीगावॉट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता से लैस होगा और देशभर के व्यवसायों को अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने इंडिया–अमेरिका कनेक्ट पहल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत दोनों देशों के बीच समुद्री केबल से वैश्विक कनेक्टिविटी का विस्तार किया जाएगा। इसे उन्होंने “दोनों देशों के बीच एक वास्तविक सेतु” बताया। उन्होंने कहा, “स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं के बिना यह संभव नहीं होगा, जो साझा विश्वास की नींव पर आधारित हों।”
अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का एआई भविष्य केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदारियों, बड़े पैमाने पर कौशल विकास और सतत अवसंरचना निवेश से आकार लेगा, जो मजबूत अमेरिका-भारत सहयोग पर आधारित होगा।
इनपुट -पीआईबी




