चीन फिर बना जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

21 February, 2026, 10:35 am

बर्लिन, 21 फरवरी 2026( DPA)चीन ने एक बार फिर अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने का स्थान हासिल कर लिया है। जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय (Federal Statistical Office) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में चीन के साथ कुल आयात-निर्यात व्यापार €251.8 अरब (लगभग $296.6 अरब) रहा।

2025 के प्रमुख आंकड़े

चीन-जर्मनी कुल व्यापार: €251.8 अरब (+2.1%)
* अमेरिका-जर्मनी कुल व्यापार: €240.5 अरब (-5%)
अमेरिका को जर्मन निर्यात: €146.2 अरब (-9.4%)
चीन से जर्मन आयात: €170.6 अरब (+8.8%)

चीन 2016 से 2023 तक जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा था। 2024 में अमेरिका पहले स्थान पर आया था, लेकिन 2025 में चीन ने फिर बढ़त बना ली।

टैरिफ विवाद का असर

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trumpकी आक्रामक व्यापार नीति और बढ़े हुए टैरिफ के कारण जर्मन-अमेरिकी व्यापार प्रभावित हुआ।

*जर्मनी के कार और ऑटो पार्ट्स निर्यात में 17.8% की गिरावट दर्ज की गई।
 कुल मिलाकर अमेरिका को जर्मन निर्यात में 9.4% की कमी आई।

हालांकि, इसके बावजूद अमेरिका लगातार 10वें वर्ष भी Made in Germany उत्पादों का सबसे बड़ा एकल बाज़ार बना रहा।

 चीन का आयात में दबदबा कायम

2015 से ही चीन जर्मनी के लिए सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है। 2025 में चीन से €170.6 अरब का आयात हुआ, जो 8.8% की वृद्धि दर्शाता है।

नीदरलैंड और अमेरिका क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

यूरोप की ओर रुख कर रहा है चीन

टैरिफ विवाद का असर चीन पर भी पड़ा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों के कारण चीन अपने उत्पादों को यूरोप, विशेषकर जर्मनी, की ओर मोड़ रहा है।

जर्मनी के बोएकलर फाउंडेशन से जुड़े अर्थशास्त्री सेबेस्टियन डुलिएन के अनुसार, “अमेरिका में बढ़ती व्यापारिक बाधाओं के कारण चीनी सामान अब यूरोप में ज्यादा आ रहा है।”

दूसरी ओर, अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय संघ के बाजार में आसान पहुंच का लाभ मिला है और उन्होंने जर्मनी को अपने निर्यात में 2.7% की बढ़ोतरी की है।

 जर्मन निर्यातकों की चेतावनी

जर्मनी के फेडरल होलसेल एंड फॉरेन ट्रेड एसोसिएशन (BGA) के अध्यक्ष डिर्क जांडुरा ने कहा:

“एक ओर संरक्षणवाद और दूसरी ओर संरचनात्मक असंतुलन यह किसी निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल माहौल नहीं है।”

उन्होंने सप्लाई चेन को विविध बनाने, नए बाजार तलाशने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

चीन के साथ बढ़ता व्यापार और अमेरिका के साथ घटता निर्यात यह संकेत देता है कि वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव जारी है। जर्मनी जैसी निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह एक रणनीतिक चेतावनी भी है — जहां उसे नई साझेदारियों, वैकल्पिक बाजारों और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की जरूरत होगी।