अल्ज़ाइमर की नई दवा डोनानेमाब पर जर्मनी का बड़ा फैसला, ‘कोई अतिरिक्त फायदा नहीं’

जर्मनी की शीर्ष स्वास्थ्य संस्था Joint Federal Committee (G-BA) ने अल्ज़ाइमर की नई दवा डोनानेमाब (Donanemab)को लेकर बड़ा निष्कर्ष दिया है। समिति के मुताबिक, इस दवा से मौजूदा इलाज की तुलना में मरीजों को कोई अतिरिक्त लाभ (Added Benefit)नहीं मिला है।
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निष्कर्ष पहले से मौजूद एक अन्य दवा लेकानेमाब (Lecanemab) के समान ही है, जिसे जर्मनी में पहले अल्ज़ाइमर के इलाज के लिए मंजूरी दी गई थी।
क्या कहा समिति ने?
समिति के चेयरमैन Josef Hecken ने कहा:
“उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर डोनानेमाब से भी कोई अतिरिक्त लाभ साबित नहीं हो पाया। यह निराशाजनक है क्योंकि मरीजों और डॉक्टरों को इससे काफी उम्मीदें थीं।”
किन मरीजों पर असर?
दोनों दवाएं सिर्फ अल्ज़ाइमर के शुरुआती चरण (Early Stage)के मरीजों के लिए हैं ।लेकिन ये भी बहुत सीमित संख्या के मरीजों पर ही लागू होती हैं।हल्के डिमेंशिया (Mild Dementia) वाले मरीजों में कोई फायदा साबित नहीं हुआ
माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट वाले मामलों में पर्याप्त डेटा नहीं मिला। इलाज जारी रहेगा, लेकिन सवाल बरकरार बना हुआ है । हालांकि इन दवाओं को अभी डॉक्टर लिख सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में इनकी उपयोगिता पर सवाल उठ सकते हैं।
लेकानेमाब जर्मनी में Leqembi नाम से उपलब्ध है
डोनानेमाब Kisunla नाम से बाजार में है।
ये दवाएं बीमारी को धीमा करने का दावा करती हैं, लेकिन इलाज (Cure)नहीं हैं
आगे क्या?
यह निर्णय दवा कंपनियों और सरकारी बीमा कंपनियों के बीच कीमत तय करने की बातचीत को प्रभावित करेगा।अगर सहमति नहीं बनती, तो कंपनियां जर्मन बाजार से दवा वापस भी ले सकती हैं।समिति ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में नए डेटा आने पर इस फैसले में बदलाव संभव है।
अल्ज़ाइमर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में नई दवाओं से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन मौजूदा शोध के आधार पर डोनानेमाब और लेकानेमाब से कोई ठोस अतिरिक्त फायदा साबित नहीं हुआ है जो मरीजों और चिकित्सा जगत दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
इनपुट -डीपीए




