युद्ध में जन्मी मासूमियत: यूक्रेन से बचाए गए कुत्तों की नई जिंदगी 

1 March, 2026, 9:49 pm

By Anja Sokolow, dpa

बर्लिन, 1 मार्च 2026

रूस-यूक्रेन युद्ध अपने पांचवें वर्ष में है। इस संघर्ष ने जहां लाखों लोगों को प्रभावित किया है, वहीं हजारों बेजुबान जानवर भी इसकी त्रासदी झेल रहे हैं। वर्ष 2022 से अब तक बड़ी संख्या में कुत्तों, बिल्लियों और अन्य पशुओं को युद्धग्रस्त इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

बर्लिन के पास बना सुरक्षित आश्रय

बर्लिन से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित “Rendez-vous with Animals” शेल्टर में पशु-चिकित्सक *Hasan Tatari* और उनकी टीम यूक्रेन से लाए गए घायल और मानसिक रूप से आहत जानवरों की देखभाल कर रहे हैं।टटारी के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक उनके शेल्टर में करीब 130 यूक्रेनी कुत्ते आए, जिनमें से लगभग 70% को नया परिवार मिल चुका है। अधिकांश को बर्लिन और ब्रांडेनबर्ग क्षेत्र में गोद लिया गया है।

मीना: संघर्ष के बाद भी जिंदा जज्बा

मिक्स्ड ब्रीड कुतिया “मीना” को संभवतः गोली मारी गई और फिर वाहन से कुचल दिया गया। वह अब लकवाग्रस्त है और विशेष व्हीलचेयर की सहायता से चलती है।

टटारी कहते हैं,“उसकी आंखों में कृतज्ञता साफ दिखाई देती है। वह जीवन से भरपूर है।”हालांकि, उसकी विकलांगता और चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत के कारण उसे गोद लेने वाला परिवार मिलना आसान नहीं है।

 एयर-रेड शेल्टर में मिली ‘सोफिया’

कुतिया “सोफिया” अपने आठ पिल्लों के साथ यूक्रेन के एक एयर-रेड शेल्टर में मिली थी। अब वह जर्मनी में सुरक्षित है और उसके सभी पिल्ले स्वस्थ रूप से बड़े हो रहे हैं। एक पिल्ले का नाम “पांडा” रखा गया है, उसकी आंखों के आसपास काले धब्बों के कारण।

राहत और पुनर्वास के आंकड़े

शेल्टर संचालकों के अनुसार, 2022 से 2025 के अंत तक:456 कुत्ते,65 बिल्लियां,2 घोड़े यूक्रेन से लाकर उपचार, क्वारंटीन और नसबंदी की प्रक्रिया से गुजारे गए।PETA(People for the Ethical Treatment of Animals) का कहना है कि उसने 2022 से अब तक लगभग 30,000 जानवरों को बचाया है। इनमें से 25-30% को उनके मूल मालिकों से दोबारा मिलाया गया, जबकि कुछ को यूरोप के विभिन्न देशों, जिनमें जर्मनी भी शामिल है, में नया घर मिला।जर्मन एनिमल वेलफेयर फेडरेशन, यूक्रेनी संगठन UAnimals के साथ मिलकर फ्रंटलाइन क्षेत्रों से जानवरों को सुरक्षित इलाकों में पहुंचा रहा है। हालांकि, शेल्टर क्षमता अब लगभग भर चुकी है।

मानसिक आघात बड़ी चुनौती

युद्ध से आए कई जानवर तेज आवाज, गरज या धमाकों से डर जाते हैं। कुछ इंसानों से भी सहमे रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भरोसा लौटाने के लिए समय और निरंतर देखभाल जरूरी है।कुछ जानवर स्थायी रूप से ट्रॉमा का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनका पुनर्वास और गोद लिया जाना कठिन हो जाता है।

 दीर्घकालिक समाधान पर बहस

ब्रांडेनबर्ग की पशु कल्याण आयुक्त ऐन ज़िन्के के अनुसार, युद्ध क्षेत्र से जानवरों को सुरक्षित वातावरण में ले जाना सकारात्मक कदम है। हालांकि, दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान यूक्रेन के भीतर ही विकसित किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में “सड़क पशुओं” की समस्या और पीड़ा को रोका जा सके।यूक्रेन का युद्ध केवल मानवीय संकट नहीं, बल्कि पशु-कल्याण की भी गंभीर परीक्षा है। बम और गोलियों के बीच जन्मे इन जानवरों की आंखों में अब भी भरोसे की चमक है। सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके लिए स्थायी सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित कर पाएगा।