जर्मनी में मुस्लिमों के साथ भेदभाव: सर्वे में चौकाने वाले आंकड़े

जर्मनी में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव के मामलों को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। एक बड़े सामाजिक सर्वे के अनुसार जर्मनी में एक चौथाई से अधिक मुस्लिमों ने पिछले एक वर्ष के दौरान भेदभाव का सामना करने की बात कही है।
जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा किए गए वार्षिक सोशियो-इकोनॉमिक पैनल (SOEP) अध्ययन में यह जानकारी सामने आई। इस सर्वे में देशभर के लगभग 30,000 लोगों से बातचीत की गई। रिपोर्ट के अनुसार कुल 13.1 प्रतिशत लोगों ने पिछले 12 महीनों में किसी न किसी रूप में भेदभाव झेलने की बात कही।
हालांकि जब केवल मुस्लिम समुदाय की बात की गई तो यह आंकड़ा बढ़कर 28.6 प्रतिशत हो गया, जो गैर-मुस्लिमों के मुकाबले काफी अधिक है। गैर-मुस्लिमों में भेदभाव का अनुभव करने वालों की संख्या लगभग 10.1 प्रतिशत रही।
सर्वे में यह भी सामने आया कि हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं को भेदभाव का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है। ऐसी महिलाओं में 38 प्रतिशत से अधिक ने बताया कि उन्हें पिछले एक साल में किसी न किसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा।
यह आंकड़े मई 2021 से जनवरी 2023 के बीच एकत्र किए गए थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अवधि पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव का भी असर रहा हो सकता है।
जर्मनी की स्वतंत्र संघीय एंटी-डिस्क्रिमिनेशन आयुक्त फेर्डा अतामन ने कहा कि देश में भेदभाव की यह स्थिति एक गंभीर चुनौती है और समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा।
सर्वे में शामिल लोगों से जब भेदभाव के कारण पूछे गए तो सबसे ज्यादा मामलों में नस्ल और जातीय पहचान (41.9%) को वजह बताया गया। इसके अलावा दिखावट (25.9%)और लिंग या जेंडर पहचान (23.8%) भी प्रमुख कारणों में शामिल रहे।
प्रतिभागियों ने बताया कि उन्हें रोजमर्रा की कई जगहों पर भेदभाव झेलना पड़ा, जैसे खरीदारी के दौरान, बैंक में, रेस्टोरेंट में या नाइट क्लब के प्रवेश द्वार पर।
SOEP अध्ययन जर्मनी में सामाजिक विज्ञान के सबसे विश्वसनीय और व्यापक सर्वेक्षणों में से एक माना जाता है। इसमें कई वर्षों तक एक ही परिवारों और व्यक्तियों से जानकारी लेकर समाज में लंबे समय के बदलावों को समझने की कोशिश की जाती है।
Input (DPA)




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