बोगोटा अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला के भारत मंडप 2026 में रवींद्रनाथ टैगोर, भगवद गीता और बहुभाषी कहानी आकर्षण के केंद्र में रहे

30 April, 2026, 6:24 pm

बोगोटा अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला के भारत मंड

बोगोटा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले (FILBo) 2026 में भारत मंडप में दिन 7 से 9 के दौरान साहित्यिक सत्रों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और बच्चों के लिए इंटरैक्टिव गतिविधियों के विविध कार्यक्रमों के साथ आगंतुकों की मजबूत भागीदारी लगातार बनी रही। भारत/इंडिया स्टेज और किड्स ज़ोन इस दौरान प्रमुख आकर्षण रहे।

दिन 7 पर “बहुभाषी भारत : भाषाओं और विभिन्न पाठक वर्गों के बीच लेखन“ (Multilingual India: Writing Across Languages and Audiences) सत्र में सुश्री लॉरा नतालिया रीना गोमेज़, श्री कुमार विक्रम और श्री अनंत विजय ने भाग लिया, जिसकी शुरुआत सुश्री मनोरमा मिश्रा ने की। इस सत्र में भाषा को सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम बताते हुए लॉरा नतालिया रीना गोमेज़ ने रूपक को मानवीय अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण साधन बताया। श्री कुमार विक्रम ने नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया की अनुवाद पहल पर प्रकाश डालते हुए अनुवादकों की भूमिका और मूल भाव को बनाए रखने की जिम्मेदारी पर बल दिया, जबकि श्री अनंत विजय ने कहा कि भाषाई विविधता के बावजूद भारत की सांस्कृतिक चेतना एकजुट है।

“एक योग साधक के रूप में मेरा अनुभव: कोलंबिया से भारत और वापसी/पहले” (My Experience as a Yoga Practitioner: From Colombia to India and Back) सत्र में श्री मिगुएल कॉर्डोबा ने योग के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिसे उन्होंने भारतीय दर्शन से जुड़ा एक परिवर्तनकारी अनुशासन बताया। प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र के समापन में योग के क्रमिक साधना पथ पर चर्चा हुई। अपने निष्कर्ष में प्रो. मराठे ने कहा कि “पूर्वी और पश्चिमी दोनों दृष्टिकोणों में योग एक अनुशासित और क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि आत्मबोध के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।”

दिन का अंतिम सत्र “गतिशील कहानियाँ: प्रदर्शन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति” (Stories in Motion: Performance and Cultural Expression) में श्री हुमायूं खान और श्री गुस्तावो अंगारिता ने कला, बहुभाषिकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में थिएटर व सिनेमा की भूमिका पर चर्चा की।

शाम को सुश्री एरिका डेर्डेले और सुश्री निकोल टेनोरियो पोलो द्वारा कथक और भरतनाट्यम प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिसके बाद ‘नीरजा’ फिल्म का प्रदर्शन किया गया। वर्षा के कारण उपस्थिति प्रभावित होने के बावजूद किड्स ज़ोन में एंटोनिया सानिन द्वारा “कहानियाँ साझा करना, दुनियाएँ साझा करना” (Sharing Stories, Sharing Worlds) जैसे सत्रों और इंडिया क्विज़ के माध्यम से बच्चों की भागीदारी बनी रही।

दिन 8 की शुरुआत “वैश्विक नागरिक के रूप में टैगोर” (Tagore as a Global Citizen) सत्र से हुई, जिसमें श्री बिस्वदीप चक्रवर्ती और श्री शिव प्रसाद ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर के वैश्विक दृष्टिकोण, उनके मानवीय विचारों और लैटिन अमेरिका से उनके संबंधों पर चर्चा की। इस सत्र का संचालन श्री हुमायूं खान ने किया।

“भगवद्गीता का सार्वभौमिक संदेश : भारत और दुनिया के लिए” (Universal Message of Bhagavad Gita: For India and Beyond) सत्र में श्री शिव प्रसाद और श्री मिगुएल कॉर्डोबा ने गीता को कर्तव्य, आत्मबोध और आंतरिक संतुलन का मार्गदर्शक बताया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. मराठे ने की और संचालन श्री शांतनु गुप्ता ने किया।

“योग, कल्याण और ज्ञान परंपराएँ” (Yoga, Wellness and Knowledge Traditions) सत्र में श्री भूषण भावे और श्री मिगुएल कॉर्डोबा ने योग को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का माध्यम बताया। श्री दीपक करंजीकर ने इसका संचालन किया।

नामक पब्लिकेशंस द्वारा आयोजित “इस अशांत समय में ‘जॉयफुल टैलिस्मन’ दर्शन हमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व कैसे सिखाता है?” (How Does the Joyful Talisman Philosophy Teach Us Peaceful Coexistence in These Troubled Times?) प्रस्तुति में सुश्री येसिका बैरेरा ने आत्मचिंतन, नैतिकता और जागरूकता के महत्व पर बल दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में डेव गाराय, गुस्तावो पेरेज़ और एरिका डेर्डेले ने प्रदर्शन किया, जबकि ‘क्वीन’ फिल्म का प्रदर्शन किया गया। किड्स ज़ोन में राफेल यॉकटेंग की चित्रकला कार्यशाला और सुश्री निजू दुबे द्वारा संचालित इंडिया क्विज़ ने बच्चों में उत्साह और जिज्ञासा को बढ़ाया।

नौवें दिन/दिन 9 पर “भारतीय भाषाओं के समकालीन साहित्य में प्रवृत्तियाँ” (Trends in Contemporary Literature in Indian Languages) सत्र में श्री दीप सैकिया के संचालन में स्वर्णजीत सावी, उषा उपाध्याय और बिभुदत्त प्रमोद कुमार मिश्रा ने पंजाबी, गुजराती और हिंदी साहित्य की विविधता और समकालीन विषयों पर चर्चा की।

“भौगोलिक सीमाओं से परे : डिजिटल मीडिया के माध्यम से कहानी कहना” (Beyond Geographies: Storytelling through Digital Media) सत्र में श्री शांतनु गुप्ता और राफेल यॉकटेंग ने डिजिटल माध्यमों की भूमिका और उनकी चुनौतियों पर विचार साझा किए।

“राष्ट्रीय कहानियाँ, वैश्विक मंच : पुस्तक महोत्सवों की भूमिका” (National Tales, Global Stages: The Role of Book Festivals)  सत्र में श्री कुमार विक्रम और श्री आंद्रेस बर्रागान ने पुस्तक मेलों को सांस्कृतिक और आर्थिक मंच के रूप में रेखांकित किया। श्री कुमार विक्रम ने बताया कि भारत ने 75 पुस्तकों का स्पेनिश में अनुवाद किया है, जिनमें से 52 पुस्तकें मेले में प्रदर्शित की जा रही हैं।

अंतिम सत्र “भारतीय ज्ञान प्रणालियाँ: परिवर्तन में निरंतरता” (Indian Knowledge Systems: Continuity in Change) में श्री भूषण भावे और श्री शिव प्रसाद ने पारंपरिक ज्ञान, स्थिरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर चर्चा की।

दिन का समापन सुश्री निकोल टेनोरियो पोलो की भरतनाट्यम प्रस्तुति “नृत्य और नाट्य के माध्यम से भक्ति” (Devotion through Nritya and Natya) और ‘सूररई पोट्रु’ फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुआ।

किड्स ज़ोन पूरे समय जीवंत बना रहा, जहाँ एंटोनिया सानिन की कहानी प्रस्तुति, पार्थ सेनगुप्ता की “अपनी कहानी का पोस्टर बनाएँ” (Create Your Own Story Poster) कार्यशाला और बार-बार आयोजित इंडिया क्विज़ ने बच्चों की उत्साहमय भागीदारी सुनिश्चित की। इसने भारत मंडप को सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रचनात्मक अधिगम के एक जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित किया।

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