जलवायु नवाचार में गति, पैमाना और सतत विकास के साथ भारत को निभानी होगी नेतृत्वकारी भूमिका :Amitabh Kant

नई दिल्ली: पूर्व जी-20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ Amitabh Kant ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का संकट नहीं, बल्कि वर्तमान की कठोर वास्तविकता है। बाढ़, हीटवेव और चरम मौसम की घटनाएं पहले से ही लोगों के जीवन, कृषि और अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही हैं, खासकर उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों में।
प्लेनरी सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने जोर दिया कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है, तो 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तीव्र और व्यापक कटौती अनिवार्य है। बीता दशक अब तक का सबसे गर्म दशक रहा है, जो इस चुनौती की गंभीरता को स्पष्ट करता है।
नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग
अमिताभ कांत ने भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देश बन चुका है। देश की लगभग 50 प्रतिशत स्थापित बिजली क्षमता अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आ रही है।
उन्होंने बताया कि 2005 से 2020 के बीच भारत ने अपने जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 36 प्रतिशत की कमी की है। सौर ऊर्जा क्षमता में तेज विस्तार ने भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है।
ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया पर फोकस
कांत ने कहा कि भारत का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है। सौर ऊर्जा के माध्यम से स्वच्छ ईंधन उत्पादन कर न केवल जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता घटाई जा सकती है, बल्कि इस्पात, उर्वरक और परिवहन जैसे क्षेत्रों का डीकार्बोनाइजेशन भी संभव है।
उन्होंने इस संक्रमण को समर्थन देने के लिए इलेक्ट्रोलाइजर सहित घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने पर विशेष बल दिया।
तेजी से उभरता क्लाइमेट-टेक इकोसिस्टम
अमिताभ कांत ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्लाइमेट-टेक इकोसिस्टम में से एक है। देश में 800 से अधिक जलवायु-केंद्रित स्टार्टअप्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी रीसाइक्लिंग, एग्री-टेक, वितरित सौर ऊर्जा और उत्सर्जन ट्रैकिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन का है। नवाचार को धरातल पर व्यापक प्रभाव में बदलना होगा।
जलवायु कार्रवाई में एआई की भूमिका
कांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को जलवायु कार्रवाई का एक सशक्त उपकरण बताया। एआई फसल योजना में सुधार, शहरों में ऊर्जा प्रबंधन, उत्सर्जन की निगरानी और कचरा प्रबंधन को अधिक कुशल बना सकता है।
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि एआई ऊर्जा-गहन तकनीक है, इसलिए इसे नवीकरणीय ऊर्जा और दक्ष प्रणालियों से संचालित करना आवश्यक है, अन्यथा यह स्वयं कार्बन उत्सर्जन का स्रोत बन सकता है।
जलवायु वित्त की बढ़ती जरूरत
उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त को बड़े पैमाने पर बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। वैश्विक पूंजी उपलब्ध है, लेकिन चुनौती बैंक योग्य परियोजनाओं की संरचना, जोखिम में कमी और निजी निवेश को आकर्षित करने की है।
बहुपक्षीय संस्थानों और नवाचारी वित्तीय उपकरणों की भूमिका इस दिशा में निर्णायक होगी।
नागरिकों की जिम्मेदारी भी जरूरी
अमिताभ कांत ने कहा कि केवल नीतियां और तकनीक पर्याप्त नहीं होंगी। कचरा पृथक्करण, टिकाऊ उपभोग और सामुदायिक भागीदारी जैसे कदम शहरी स्थिरता और वायु गुणवत्ता सुधार में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा हरित और सतत होनी चाहिए। सही नीतियों, बड़े पैमाने के क्रियान्वयन और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारत न केवल हरित समाधान को सस्ता और सुलभ बना सकता है, बल्कि जलवायु नवाचार में वैश्विक नेतृत्व भी स्थापित कर सकता है।




