IDC और ऑस्ट्रेलिया के ग्रुप कॉलेजेज़ ने ‘एप्लाइड एआई फॉर एजुकेशन’ पर सत्र आयोजित किया
चंडीगढ़, 28 फरवरी।
Institute for Development and Communication (IDC) के CASSM (Centre of Advanced Studies in Social Sciences and Management - CU-IDC), चंडीगढ़ और Universal Business School Sydney (UBSS) सहित ऑस्ट्रेलिया के ग्रुप कॉलेजेज़ ने शनिवार को ‘Applied AI for Education: Global Opportunities’ विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उभरते रुझानों, वैश्विक अवसरों और व्यावहारिक उपयोगों पर व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करना था।
सत्र को ऑस्ट्रेलिया से ज़ूम के माध्यम से संबोधित करते हुए GCA-UBSS के सीईओ और चीफ एकेडमिक ऑफिसर प्रो. एलन बोवेन-जेम्स ने कहा कि एआई को “सिंथेटिक इंटेलिजेंस” और मानव बुद्धिमत्ता को “कार्बन इंटेलिजेंस” के रूप में समझना अधिक उपयुक्त होगा, क्योंकि दोनों के बीच मौलिक अंतर हैं। उन्होंने कहा कि जब एआई कार्यबल का अभिन्न हिस्सा बन रहा है, तब मज़बूत नियामक ढांचे की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।
प्रो. बोवेन-जेम्स ने स्पष्ट किया कि एआई के उपयोग में क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं, इसे स्पष्ट करने के लिए प्रभावी गवर्नेंस व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नैतिकता (Ethics) और नैतिक मूल्यों (Morality) के बीच अंतर को समझते हुए उचित दिशा-निर्देश तय किए जाने चाहिए। “यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एआई के कारण मानव आलसी न हो जाए। साथ ही उपयुक्त कनेक्टिविटी और साइबर सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि एआई और साइबर सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं,” उन्होंने कहा।
IDC के चेयरपर्सन डॉ. प्रमोद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में एआई को लेकर जो शोर और भ्रम फैला हुआ है, उसे दूर करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “ह्यूमन इंटेलिजेंस (HI) यह समझती है कि लोग जिस तरह व्यवहार करते हैं, उसके पीछे कारण क्या हैं, जबकि एआई यह पहचानती है कि आगे कौन-सा व्यवहार संभावित है। एआई का दायरा शासन, बाज़ार, संचार और पहचान निर्माण तक तेजी से फैल रहा है, लेकिन मानव बुद्धिमत्ता की बुनियादी भूमिका कायम रहेगी, क्योंकि समाज केवल डेटा नहीं, बल्कि जीवंत अनुभवों का समुच्चय है।”
इस अवसर पर मौजूद GCA-UBSS के डायरेक्टर और प्रेसिडेंट गैरी मल्होत्रा ने एआई के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम नवाचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे एआई के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक परिवर्तनों और तकनीकी प्रगति से स्वयं को अपडेट रखें, ताकि भविष्य के शैक्षणिक और पेशेवर अवसरों का लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थानों ने छात्र विनिमय (Student Exchange) कार्यक्रम की भी घोषणा की। इसके तहत विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव प्राप्त करने, वैश्विक शिक्षण पद्धतियों को समझने और एआई आधारित शिक्षा मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव लेने का अवसर मिलेगा।
सत्र में शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की और एआई के भविष्य, उसके नियमन तथा शिक्षा प्रणाली पर उसके प्रभाव को लेकर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम ने शिक्षा और तकनीक के संगम पर वैश्विक सहयोग की नई संभावनाओं के द्वार खोले।




