श्री गुरु तेग बहादुर साहिबजी के त्याग के प्रति देश सदैव ऋणी रहेगा:गृहमंत्री अमित शाह

2 March, 2026, 8:10 am

 

नवी मुंबई, 2 मार्च: गुरु तेग बहादुर, जिन्हें पूरे देश में आदरपूर्वक “हिंद दी चादर” के नाम से जाना जाता है, उनका शहीदत्व केवल सिख समाज के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने धर्मस्वातंत्र्य और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपना शीश अर्पित किया। देश उनके इस महान त्याग का सदैव ऋणी रहेगा, ऐसा प्रतिपादन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया।

अल्पसंख्यक विकास विभाग तथा राज्यस्तरीय समागम समिति की ओर से नवी मुंबई के खारघर में आयोजित 350वें शहीदी समागम कार्यक्रम में वे संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, अखिल भारतीय धर्मजागरण मंच के प्रमुख शरदराव ढोले, शहीदी समागम समिति के मार्गदर्शक बाबा हरनाम सिंह जी (मुखी, दमदमी टकसाल, प्रधान संत समाज), बंजारा समाज के धर्मगुरु बाबूसिंह महाराज, राज्य समन्वय समिति के समन्वयक रामेश्वर नाईक तथा निमंत्रक बल मलकित सिंह सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

कार्यक्रम के महत्व को स्पष्ट करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बाबा हरनाम सिंह जी ने “हिंद दी चादर” का संदेश प्रत्येक गुरुद्वारे और प्रत्येक बस्ती तक पहुंचाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। इससे पूर्व नांदेड़ और नागपुर में आयोजित कार्यक्रमों को भी व्यापक प्रतिसाद मिला था। नवी मुंबई के इस कार्यक्रम में सिख समाज के साथ-साथ विभिन्न समाज घटकों की बड़ी भागीदारी रही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख समाज की परंपराओं, आस्था और योगदान का विभिन्न अवसरों पर सम्मान किया है तथा देशभर में “हिंद दी चादर” पर्व का आयोजन इसी भावना से किया जा रहा है।

संत परंपरा का स्मरण करते हुए उन्होंने पोहरादेवी के संत सेवालाल महाराज और संत नामदेव को नमन किया। संत नामदेव की रचनाओं का गुरु ग्रंथ साहिब में समावेश भारतीय संत परंपरा की व्यापकता और समावेशी स्वरूप का प्रमाण है। इसी प्रकार संत रविदास के विचारों को भी गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान प्राप्त है, जिससे भारतीय अध्यात्म की सर्वसमावेशी भावना स्पष्ट होती है।

गुरु तेग बहादुर की शहादत का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध उनका बलिदान भारतीय इतिहास की अत्यंत प्रेरणादायी घटना है। “शीश दिया, पर सिर न झुकाया” सिख गुरु परंपरा की पहचान है और भारत की अखंडता का आधार है।

उन्होंने सिख परंपरा में नामजप, आराधना और लंगर की महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि इन मूल्यों से समाज में समरसता और भाईचारा सुदृढ़ होता है। गुरु गोविंद सिंह के समय खालसा पंथ की स्थापना हुई और धर्मरक्षा हेतु त्याग की परंपरा और अधिक सशक्त हुई। उनके चारों सुपुत्रों की शहादत ने इस परंपरा को अमर बना दिया।

आनंदपुर साहिब जैसे पवित्र स्थलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुरुओं का अन्यायपूर्ण फरमानों के समक्ष न झुकना भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उन्होंने 350वें शहीदी समागम का संदेश महाराष्ट्र के छोटे-छोटे गांवों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की सराहना की।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, भारत की संस्कृति “सर्व धर्म समभाव” के सिद्धांत पर आधारित है और इस परंपरा को बनाए रखने में सिख गुरुओं का योगदान अमूल्य है। अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होना ही सच्ची देशभक्ति है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वतंत्रता के बाद भी देश की सुरक्षा में सिख जवानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त बनाने के लिए ऐसे ऐतिहासिक आयोजनों की आवश्यकता है।

इस अवसर पर बाबा हरनाम सिंह जी (मुखी, दमदमी टकसाल) ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को जफरनामा भेंट कर सम्मानित किया।