जर्मनी में सैन्य सेवा कानून के खिलाफ हजारों स्कूली छात्रों का प्रदर्शन

5 March, 2026, 10:53 pm

DPA

जर्मनी में नई सैन्य सेवा व्यवस्था के खिलाफ गुरुवार को हजारों स्कूली छात्र सड़कों पर उतर आए। देशभर में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को “स्कूल स्ट्राइक अगेंस्ट कंसक्रिप्शन” यानी अनिवार्य सैन्य सेवा के खिलाफ स्कूल हड़ताल का नाम दिया गया। आयोजकों के अनुसार इस आंदोलन में करीब 50 हजार छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

राजधानी बर्लिन में बड़ी संख्या में युवाओं ने पॉट्सडामर प्लात्ज़ से ओरानिएनप्लात्ज़ (क्रॉइज़बर्ग) तक मार्च निकाला। पुलिस के मुताबिक यहां लगभग 3,000 लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने 6,000 प्रतिभागियों का दावा किया।

प्रदर्शनकारियों ने बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के फैसले का विरोध किया। कई बैनरों पर लिखा था कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ खुद मोर्चे पर जाएं। प्रदर्शन के दौरान छात्र “कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं फिर से सैन्य भर्ती” जैसे नारे लगा रहे थे।

यह विरोध सिर्फ बर्लिन तक सीमित नहीं रहा। म्यूनिख में करीब 600 युवाओं ने प्रदर्शन किया। इसके अलावा नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया राज्य के बॉन और डसेलडोर्फ में भी बड़ी रैलियों की योजना बनाई गई, जबकि हैम्बर्ग में भी छात्रों ने शाम को प्रदर्शन किया।

दरअसल जर्मनी की सरकार ने पिछले साल लंबे विचार-विमर्श के बाद सैन्य सेवा को दोबारा लागू करने का कानून पारित किया था। यह कानून 1 जनवरी से लागू हो चुका है। शुरुआत में इसे स्वैच्छिक रूप में लागू किया गया है, लेकिन 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद सभी युवाओं को एक प्रश्नावली भेजी जाएगी ताकि यह आंका जा सके कि वे सेना में सेवा देने के लिए उपयुक्त और इच्छुक हैं या नहीं।

इस व्यवस्था के तहत पुरुषों के लिए प्रश्नावली भरना अनिवार्य होगा, जबकि महिलाओं के लिए यह स्वैच्छिक रखा गया है।

जर्मन सरकार का कहना है कि यह कदम रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरे और नाटो के भर्ती लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उठाया गया है। योजना के अनुसार जर्मनी अपनी सेना की संख्या 1,80,000 से बढ़ाकर 2,60,000 करना चाहता है, जबकि 2,00,000 सैनिकों का रिजर्व बलभी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि छात्रों और युवा संगठनों का कहना है कि सरकार को युवाओं को सैन्य सेवा की ओर धकेलने के बजाय शिक्षा, रोजगार और शांति की नीतियों पर ध्यान देना चाहिए। इसलिए देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।