बेटी बचाओ से नारी वंदन तक: बदलते भारत की सशक्त कहानी — रेखा शर्मा, राज्यसभा सांसद

9 April, 2026, 9:39 pm

 

नई दिल्ली, 9 अप्रैल - राज्यसभा सांसद श्रीमती रेखा शर्मा ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक संशोधन केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान का राष्ट्रीय संकल्प है।

उन्होंने कहा कि दशकों तक महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय चर्चा में रहा, लेकिन उसे संवैधानिक स्वरूप देने का साहसिक निर्णय नहीं लिया गया। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  जी के नेतृत्व में यह सपना साकार हुआ है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि महिला सशक्तिकरण अब केवल नारे तक सीमित नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकता बन चुका है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान ने देशभर में सामाजिक सोच को बदलने का कार्य किया। विशेष रूप से हरियाणा जैसे राज्य में, जहाँ कभी घटते लिंगानुपात को लेकर चिंता व्यक्त की जाती थी, आज वही प्रदेश बेटियों की उपलब्धियों के कारण देशभर में सम्मान प्राप्त कर रहा है। खेलों से लेकर शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं तक हरियाणा की बेटियाँ नई पहचान बना रही हैं।

राज्यसभा सांसद श्रीमती रेखा शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए मुझे देशभर की महिलाओं से मिलने और उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिला। मैंने अनेक माताओं की आँखों में यह सपना देखा कि उनकी बेटियाँ आगे बढ़ें, निर्णय लें और समाज का नेतृत्व करें। आज नारी शक्ति वंदन अधिनियम उन सपनों को संवैधानिक शक्ति प्रदान करता है।

भारत की राजनीति में महिलाओं का योगदान सदैव प्रेरणादायक रहा है। जहां राजमाता विजया राजे सिंधिया जी ने संगठनात्मक नेतृत्व का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया। श्रीमती सुषमा स्वराज जी ने संवेदनशील और प्रभावशाली जननेतृत्व की नई परंपरा स्थापित की। जयललिता जी और सुश्री मायावती जी जैसी नेताओं ने यह सिद्ध किया कि अवसर मिलने पर महिलाएँ शासन की दिशा बदल सकती हैं।

उन्होंने कहा कि फिर भी यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर चुकी थीं, तो उन्हें राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त स्थान देने का निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया? यह विषय वर्षों तक राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में लंबित रहा। आज यह संतोष का विषय है कि इसे केवल घोषणा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि संवैधानिक रूप देकर वास्तविकता में बदला गया।

राज्यसभा सांसद श्रीमती रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीति-निर्माण की दिशा अधिक संवेदनशील और समावेशी बनेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को नई प्राथमिकता मिलेगी। यह परिवर्तन केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के संतुलित विकास के लिए आवश्यक है।

हरियाणा से राज्यसभा सांसद होने के नाते मेरे लिए यह क्षण विशेष रूप से भावनात्मक है। यह उन माताओं के संघर्ष का सम्मान है जिन्होंने सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपनी बेटियों को आगे बढ़ाया। यह उन बेटियों के आत्मविश्वास का उत्सव है जो आज देश के विकास की सहभागी बन रही हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से प्रारंभ हुई यह यात्रा अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच तक पहुँच रही है। आज हरियाणा की हर बेटी के लिए यह संदेश है। अब अवसर भी आपके हैं, नेतृत्व भी आपका है और भविष्य भी आपका है।