प्रशासकीय महिला अधिकारियों के पहले अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन से ‘महिला सशक्तिकरण’ का बुलंद संदेश

12 April, 2026, 7:58 pm

 

नई दिल्ली, 12 अप्रैल — महिलाओं में काम करने की अपार क्षमता होती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जज़्बा उनके भीतर स्वाभाविक रूप से मौजूद होता है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाते समय स्वयं को केवल “महिला” के रूप में नहीं, बल्कि एक सक्षम अधिकारी के रूप में स्थापित करना बेहद आवश्यक है। यह विचार मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त आश्विनी भिडे ने व्यक्त किए।

नई दिल्ली में आयोजित प्रशासनिक महिला अधिकारियों के पहले अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन में वह वर्चुअल माध्यम से शामिल हुईं। इस सम्मेलन में विभिन्न सत्रों के जरिए प्रशासनिक अनुभव, भाषा-संस्कृति और महिला सशक्तिकरण के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई।

प्रशासन में संवाद और संतुलन पर जोर

‘सृजन की मुक्त उड़ान: सपना और हकीकत’ विषय पर आयोजित विशेष संवाद सत्र में वरिष्ठ पत्रकार मृणालिनी नानिवडेकर ने आश्विनी भिडे का साक्षात्कार लिया। इस दौरान भिडे ने बताया कि सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग और जनता से सीधा संवाद प्रशासन में विश्वास कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस, पारिवारिक सहयोग और टीम बिल्डिंग को सफलता का आधार बताया।
उन्होंने कहा कि सभी को साथ लेकर चलने की नीति के कारण ही मेट्रो जैसे जटिल और बड़े प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरे किए जा सके।

भाषा और संस्कृति से जुड़ाव की झलक

‘मराठी से जुड़ाव’ सत्र में अन्य राज्यों से महाराष्ट्र में सेवाएं दे रहीं महिला अधिकारियों ने अपने भाषाई और सांस्कृतिक अनुभव साझा किए।
गृह मंत्रालय की अपर मुख्य सचिव राधिका रस्तोगी ने मराठी साहित्य के उत्कृष्ट कार्यों के अनुवाद की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, निदेशक सुमन रावत ने ‘जोगवा’ और ‘उंबरठा’ जैसी फिल्मों के माध्यम से महाराष्ट्र की संस्कृति को समझने की बात कही।
श्वेता सिंघल ने भावनात्मक जुड़ाव पर जोर देते हुए कहा कि अब वे उत्तर प्रदेश से अधिक मराठी संस्कृति के करीब महसूस करती हैं, और उनके घर में मराठी परंपराएं पूरी तरह अपनाई जा चुकी हैं।

विविध राज्यों में मराठी संस्कृति की उपस्थिति

‘भाषा, संस्कृति और प्रशासन’ विषय पर आयोजित सत्र में आईपीएस अधिकारी अनुपमा निलेकर ने बिहार में मराठी समाज द्वारा गणेशोत्सव जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को उत्साह से मनाए जाने का उल्लेख किया।
अधिकारी प्रतिभा पारकर ने कहा कि भाषा, संस्कृति और साहित्य हमारी पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित करना जरूरी है। उन्होंने अंगोला में भारतीय टीम बनाकर मराठी और हिंदी नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार करने का अनुभव भी साझा किया।
ग्राम विकास विभाग की सचिव रोहिणी भाजीभाकरे ने स्थानीय भाषा सीखने के महत्व को रेखांकित करते हुए तमिल सीखने के अपने अनुभव रोचक अंदाज में बताए। ‘डोरेमॉन’ के जरिए भाषा सीखने का उनका किस्सा उपस्थित लोगों को मुस्कुराने पर मजबूर कर गया। उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा में भाषा और संस्कृति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

महिला सशक्तिकरण: अवसर और चुनौतियां

‘महिला सशक्तिकरण—अवसर, चुनौतियां और नीतिगत दिशा’ विषय पर आयोजित सत्र में विशेषज्ञों ने महिलाओं के लिए प्रशासनिक क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा की।
एलपीएआई सदस्य रेखा रायकर ने वैश्विक स्तर पर महिलाओं के संघर्ष का उल्लेख करते हुए जेंडर-न्यूट्रल प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री कार्यालय की जनसंपर्क अधिकारी कीर्ति पांडे ने कहा कि श्रमिक और नौकरीपेशा महिलाओं की समस्याएं अलग-अलग होती हैं, इसलिए नीतियां भी उसी अनुसार बननी चाहिए।
पुणे महानगरपालिका की मुख्य विधि अधिकारी डॉ. निशा चव्हाण ने महिलाओं से अपने बहुआयामी व्यक्तित्व के जरिए समाज में परिवर्तन लाने का आह्वान किया। वहीं संयुक्त आयकर आयुक्त कविता पाटील ने महिलाओं के स्वाभाविक गुणों का प्रशासनिक कार्य में सकारात्मक उपयोग करने की सलाह दी।

समापन

इस सम्मेलन के विभिन्न सत्रों का संचालन उपसचिव टीना संखे और उपवन संरक्षक स्नेहल पाटील ने किया। साथ ही क्रांति खोब्रागडे, सुचिता लोखंडे, प्रांजल चोभे-शिंदे और वरिष्ठ पत्रकार प्रगति बाणखेले ने संवादक की भूमिका निभाई।

राजधानी दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों और मराठी साहित्य के प्रति जुड़ाव का एक अनोखा संगम प्रस्तुत किया, साथ ही महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश भी दिया।