श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर राष्ट्रीय लामबंदी, धर्म संसद की तैयारी तेज

15 April, 2026, 9:33 pm


नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद तथा श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दों को श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास द्वारा प्रमुखता से उठाया गया। कार्यक्रम में आयोजकों ने इसे “धर्म, आस्था और न्याय” से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान बताते हुए देशभर के संतों और सनातन समाज से व्यापक भागीदारी का आह्वान किया।

प्रेस वार्ता में याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी जी महाराज ने कहा कि आगामी समय में एक बड़े स्तर पर धर्म संसद का आयोजन 7 जून, 2026 को तालकटोरा स्टेडियम में प्रस्तावित है, जिसमें देश-विदेश के धर्माचार्य, शंकराचार्य, जगद्गुरु और महामंडलेश्वर भाग लेंगे। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद में उनके पक्ष द्वारा न्यायालय में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जा चुके हैं और उन्हें संविधान तथा न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष के पास अपने दावों को सिद्ध करने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं और मामला कानूनी प्रक्रिया में लंबित रखने का प्रयास किया जा रहा है। फलाहारी जी ने सभी सनातन अनुयायियों से इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

मुख्य संरक्षक एवं कार्यक्रम प्रभारी रूप सिंह नागर ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य देशभर के संतों, अखाड़ों और धार्मिक संगठनों को एक मंच पर लाना है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में देशव्यापी संपर्क अभियान चलाया जाएगा और विभिन्न स्थानों पर यात्राओं के माध्यम से जनसमर्थन जुटाया जाएगा। नागर ने यह भी कहा कि यह मुद्दा धार्मिक आस्था से जुड़ा है और इसे लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की सह-प्रभारी एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोनिया ठाकुर ने इसे “सनातन समाज की सामूहिक आस्था का प्रश्न” बताते हुए कहा कि प्रस्तावित धर्म संसद में लाखों लोगों की भागीदारी की उम्मीद है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से देशभर में संदेश पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया और दिल्ली, मथुरा, आगरा तथा वृंदावन सहित विभिन्न क्षेत्रों से लोगों को बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। उनके अनुसार, यह केवल एक संगठन या व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक धार्मिक समुदाय की आस्था से जुड़ा विषय है।

प्रेस वार्ता के दौरान एपी सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि प्रस्तावित धर्म संसद के माध्यम से वे अपने पक्ष को संगठित और सशक्त रूप से प्रस्तुत करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां जारी हैं और आने वाले समय में इसे व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने की रणनीति बनाई जा रही है।