चांदनी चौक में गूंजी नारी शक्ति की हुंकार — संसद से पहले सड़कों पर महिलाओं का संकल्प, ‘आधी आबादी अब पूरी भागीदारी’!

15 April, 2026, 9:38 pm

 

संसद में प्रस्तावित महिला आरक्षण विधेयक पर ऐतिहासिक चर्चा से ठीक एक दिन पूर्व आज दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र में “नारी शक्ति वंदन यात्रा” के अभूतपूर्व और अविस्मरणीय आयोजन में नारी सशक्तिकरण का सैलाब पूरे उत्साह और वेग से महिला आरक्षण के समर्थन का बड़ा बिगुल बजा रहा था। इस विशाल जनआंदोलन का नेतृत्व चांदनी चौक के सांसद तथा कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने किया। उनके साथ भाजपा चाँदनी चौक जिला अध्यक्ष श्री अरविंद गर्ग एवं केशवपुरम जिला अध्यक्ष श्री अजय खटाना सहित हजारों की संख्या में सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों की महिलाओं ने भाग लिया। 

यह यात्रा टाउनहाल घंटाघर से शुरू होकर चांदनी चौक के मुख्य बाज़ार से गुजरती हुई ऐतिहासिक लालकिले पर पहुँची जहाँ ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर के ठीक नीचे महिलाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर महिला आरक्षण का ज़बर्दस्त उद्घोष किया तथा नारी एकता, संकल्प और परिवर्तन की की मज़बूत आवाज़ को गुंजाया। हजारों महिलाओं ने जोश, उत्साह और आत्मविश्वास के साथ यात्रा में भाग लेते हुए पूरे क्षेत्र को नारी शक्ति के नारों से गुंजायमान कर दिया।

यात्रा में चल रही महिलायें अपने हाथों में प्लेकार्ड लेकर पूरे जोश से “सशक्त नारी – सशक्त भारत”, “नारी का मान, देश का अभिमान”, “आधी आबादी – पूरा अधिकार”, “अबकी बार, नारी की भागीदारी हर बार”, “निर्णय में भागीदारी, नारी की जिम्मेदारी”,“नारी बढ़ेगी, देश आगे बढ़ेगा”, “नेतृत्व में नारी, विकास में तेजी भारी” जैसे नारे लगाती हुई महिला शक्ति के नए लिखे जाने वाले इतिहास की एक बड़ी तस्वीर पेश कर रही थी। 

यात्रा में चल रही महिलाओं का व्यापारियों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा और भव्य स्वागत किया गया। चांदनी चौक की सड़कों पर ऐसा जनसैलाब और उत्साह विरले ही देखने को मिलता है। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के लिए जन-जागरण का महाअभियान बन गया।

इस अवसर पर सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। महिला आरक्षण विधेयक केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में ऐतिहासिक क्रांति है।”

उन्होंने कहा की महिलाओं को विधायिका में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना इसलिए आवश्यक है क्योंकि जब निर्णय लेने वाली टेबल पर महिलाएं होंगी, तो नीतियां अधिक संवेदनशील, संतुलित और समाज के हर वर्ग के अनुकूल होंगी। इससे—राजनीतिक क्षेत्र में भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र अधिक सर्वव्यापी होगा तथा इससे आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं के लिए अवसर, उद्यमिता और रोजगार को नई गति मिलेगी वहीं सामाजिक क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी निर्णय होंगे एवं परिवार और समाज में महिलाओं की स्थिति और सम्मान अधिक सुदृढ़ होगा

श्री खंडेलवाल ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक ‘नए भारत’ की उस सोच का प्रतीक है, जहां नारी केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनेगी।नारी शक्ति वंदन यात्रा ने यह स्पष्ट परिलक्षित किया कि देश की महिलाएं अब परिवर्तन की प्रतीक्षा नहीं करेंगी, बल्कि स्वयं परिवर्तन का नेतृत्व करेंगी। चांदनी चौक की इस ऐतिहासिक यात्रा ने पूरे देश को यह संदेश दिया कि नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है, और उसका सम्मान ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।