प्रतिबंधित पुस्तकों की प्रदर्शनी ‘Bounded Ideas?’ : विचारों को कैद नहीं किया जा सकता

6 June, 2026, 7:41 am

 

चंडीगढ़, 6 जून। चंडीगढ़ स्थित थिंक टैंक Institute for Development and Communication (IDC) ने अपने ‘थिंकर्स कलेक्टिव’ अभियान के तहत प्रतिबंधित पुस्तकों पर आधारित सप्ताहभर चलने वाली प्रदर्शनी ‘Bounded Ideas? का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में लगभग 100 प्रतिबंधित पुस्तकों के कवर और उनसे जुड़े राजनीतिक एवं सामाजिक संदर्भों की जानकारी प्रदर्शित की गई है।

प्रदर्शनी का उद्घाटन Manraj Grewal, रेजिडेंट एडिटर, The Indian Express ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दुनिया भर में आज भी किताबों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि कुछ लोग ऐसे विचारों से डरते हैं जो उनके हितों की सेवा नहीं करते। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह प्रदर्शनी अवश्य देखनी चाहिए ताकि वे समझ सकें कि विचारों को कभी कैद नहीं किया जा सकता।

प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों और देशों से जुड़ी चर्चित पुस्तकों को शामिल किया गया है। इनमें An Area of Darkness, The Satanic Verses, The Lotus and the Robot, The Man from Moscow तथा The Adivasi Will Not Dance जैसी पुस्तकें शामिल हैं। प्रदर्शनी का क्यूरेशन IDC के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की सहायक प्रोफेसर Dr. Srishti Chauhan ने किया है।

IDC के अध्यक्ष Dr. Pramod Kumar ने कहा कि आज के दौर में थिंक टैंक और शोध संस्थान समाज से कटकर नहीं रह सकते। उन्हें समकालीन मुद्दों पर हस्तक्षेप करना होगा ताकि आम नागरिक भी उनसे जुड़ाव महसूस कर सकें। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल शुरुआत है और आने वाले महीनों में ऐसी कई पहलें की जाएंगी।

डॉ. सृष्टि चौहान के अनुसार, प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल प्रतिबंधित पुस्तकों को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि असहमति, नैतिकता, राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे व्यापक सवालों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि समय के साथ बदलती है तो केवल वह सीमा, जिससे राज्य और समाज किसी पुस्तक को संभावित रूप से प्रभावशाली या खतरनाक मानते हैं।

प्रदर्शनी के दौरान डॉ. चौहान प्रतिदिन दो बार (दोपहर 12:00 से 12:30 बजे और शाम 3:30 से 4:00 बजे तक) दर्शकों के साथ अनौपचारिक संवाद भी करेंगी।

कार्यक्रम में नौकरशाहों, पूर्व न्यायाधीशों, शिक्षाविदों, छात्रों और क्षेत्र के नागरिकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किसी विचार से असहमति होने का अर्थ यह नहीं है कि उससे संवाद ही न किया जाए। इतिहास गवाह है कि कई ऐसी पुस्तकें, जिन्हें किसी समय प्रतिबंधित किया गया था, बाद में क्लासिक और अत्यंत लोकप्रिय कृतियों के रूप में स्थापित हुईं।

लोकप्रिय