राष्ट्रपति आदेश 1950 को निरस्त करने की मांग

नई दिल्ली। धार्मिक स्वतंत्रता और दलित-अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों के लिए संघर्षरत संगठन 'राष्ट्रीय मसीही परिषद' ने राष्ट्रपति आदेश, 1950 को निरस्त करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन तेज कर दिया है। इसी कड़ी में परिषद के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अड्डंकी रंजीत ओफिर, जो इंडिया प्रजा बंधु पार्टी के भी संस्थापक-अध्यक्ष हैं, उनके नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के. जी. बालकृष्णन से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें देशभर से एकत्रित 1,03,571 हस्ताक्षरों का एक व्यापक ज्ञापन सौंपा गया।
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. रंजीत ओफिर ने कहा कि हैदराबाद मुख्यालय वाली राष्ट्रीय मसीही परिषद का यह हस्ताक्षर अभियान देश के विभिन्न राज्यों में ईसाइयों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच चलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आदेश, 1950 संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28 के तहत नागरिकों को मिले धार्मिक स्वतंत्रता व समानता के मौलिक अधिकारों के विपरीत है। परिषद की मुख्य मांग है कि इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए ताकि ईसाई समुदाय को भी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक प्रावधानों का पूरा लाभ मिल सके।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर ज्ञापन सौंपने के दौरान डॉ. रंजीत ओफिर के साथ परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. एम. अरुण कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेवरेंड डॉ. यदला अब्बुलु (डॉ. वाई. अब्बुलु), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंडुकुरी विजय भास्कर और इंडिया प्रजा बंधु पार्टी (आईपीबीपी) के अध्यक्ष वी. मदु मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही परिषद के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष व प्रभारी रुंजाला जॉन अब्राहम, राष्ट्रीय जनसंपर्क प्रभारी गड्डम अशोक, डॉ. पलमाकुला मधु, डॉ. सदा शिव और श्रीकांत सहित कई अन्य प्रतिनिधियों ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। इस पूरे अभियान और मुलाकात में दिल्ली संभाग के पदाधिकारियों तथा परिषद से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
परिषद ने स्पष्ट किया है कि इस देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान का उद्देश्य सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर खींचना है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि सामाजिक न्याय और धार्मिक समानता को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। राष्ट्रीय मसीही परिषद ने दोहराया कि वह भविष्य में भी समाज के वंचित और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक व लोकतांत्रिक माध्यमों से अपना संघर्ष जारी रखेगी।









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