प्रदूषण से मुक्ति के लिए देशी पौधों की मुहिम लेकर दिल्ली पहुंचे ग्रीन क्रूसेडर

ऩई दिल्ली।ओडिशा के पर्यावरण प्रेमी एवं 'ग्रीन क्रूसेडर' के रूप में पहचान बना चुके श्री सत्यनारायण दास ने देशी पौधों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया है। नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि भारतीय वनस्पतियों में अनेक ऐसे पौधे हैं, जो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि वह इन उपायों को लेकर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलना चाहते हैं, ताकि दिल्ली जैसे देश के सर्वाधिक प्रदूषित महानगर में इन प्राकृतिक समाधानों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।
सत्यनारायण दास ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उनका कहना है कि मनुष्य को सबसे अधिक सुख और शांति प्रकृति से मिलती है, लेकिन उसकी रक्षा के लिए समय निकालने को समाज तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने परिवार और आने वाली पीढ़ी के लिए एक-एक पौधा लगाने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण का बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।
उन्होंने लोगों से विशेष रूप से देशी प्रजातियों के पौधे लगाने की अपील करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट के बढ़ते विस्तार और भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याओं से निपटने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वृक्षारोपण आवश्यक है। उन्होंने तुलसी, करी पत्ता, गुर्जला सहित कई उपयोगी पौधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पौधे पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। उनके अनुसार, प्रत्येक घर में तुलसी का पौधा होना चाहिए, क्योंकि यह पर्यावरण को बेहतर बनाने के साथ सकारात्मक वातावरण भी निर्मित करता है।
ग्रीन क्रूसेडर ने बताया कि वह अब तक 15 हजार से अधिक पौधों की निःशुल्क नर्सरी लोगों को वितरित कर चुके हैं। इन पौधों की नर्सरी वह स्वयं तैयार करते हैं और बिना किसी शुल्क के लोगों को उपलब्ध कराते हैं। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया सहित राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में भी पौधरोपण किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में बढ़ती आयु के कारण वह प्रतिदिन लगभग 40 से 50 पौधे ही लगा पाते हैं, जबकि पहले यह संख्या 50 से 60 तक होती थी। उनका मानना है कि किसी एक व्यक्ति के प्रयास से पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता, इसलिए समाज के प्रत्येक नागरिक को इस अभियान से जुड़ना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों के नाम पर कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल का संकल्प लें। उनका विश्वास है कि सामूहिक जनभागीदारी से ही स्वच्छ, हरित और प्रदूषणमुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है।












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