जब सिद्धांत और मंत्री पद चुनने पर फैसला करना पड़ा तो डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सिद्धांतों को चुना: विनोद तावड़े

5 July, 2026, 11:42 pm



गुरुग्राम,  5 जुलाई।  डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती रविवार को गुरुग्राम स्थित भाजपा कार्यालय गुरुकमल में भव्यता के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े और प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता ने डा. मुखर्जी के जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी ने की। इससे पहले जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी ने राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े और प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता का कार्यालय पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया।  


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े ने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता दीपक की तरह स्वयं तपकर समाज और राष्ट्र के जीवन में प्रकाश फैलाने का संकल्प लेकर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ पार्टी का चुनाव चिन्ह दीपक चुना था, क्योंकि दीपक स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में उजाला करता है। यही भावना भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता की होनी चाहिए कि वह अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर गरीब, वंचित और राष्ट्र के लिए कार्य करें।


विनोद तावड़े ने कहा कि 125 वर्ष पूर्व जन्मे डा. मुखर्जी ने जिस विचार को लेकर दीप प्रज्ज्वलित किया था, उसकी रोशनी आज करोड़ों कार्यकर्ताओं के माध्यम से पूरे देश में फैल रही है। उन्होंने कहा कि आज केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार तथा अनेक 17 राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री हैं और चार राज्यों में एनडीए की सरकारें डा. मुखर्जी द्वारा रखी गई वैचारिक नींव का ही परिणाम हैं।


राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन सिद्धांत, साहस और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण है। जब सिद्धांत और सुविधा में से किसी एक को चुनने का अवसर आया तो डा. मुखर्जी ने मंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया, लेकिन अपने राष्ट्रवादी विचारों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल निर्माताओं और बलिदानियों को याद रखता है, जबकि डॉ. मुखर्जी ऐसे दुर्लभ व्यक्तित्व थे जो दोनों ही थे। उन्होंने देश की आजादी के बाद राष्ट्र की एकता के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान भी दिया।


श्री तावड़े ने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक देश, एक विधान, एक निशान और एक प्रधान का संकल्प लेकर जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन किया था। बिना परमिट जम्मू-कश्मीर जाने पर उन्हें 11 मई 1953 को गिरफ्तार किया गया और 23 जून 1953 को उन्होंने सर्वाेच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटी और मोदी सरकार ने डॉ. मुखर्जी के अधूरे संकल्प को साकार किया।
विनोद तावड़े ने कहा कि मात्र 33 वर्ष की आयु में कुलपति बनने वाले डॉ. मुखर्जी शिक्षाविद, दूरदर्शी राष्ट्रवादी और जननेता थे। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, खादी और स्वदेशी की सोच को भी आगे बढ़ाया तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए सतत अध्ययन को आवश्यक बताया। डा. मुखर्जी का मानना था कि अध्ययनशील और विचारवान कार्यकर्ता ही समाज का नेतृत्व कर सकता है।


विनोद तावड़े ने कहा कि जिस दीपक को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जलाया था, उसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहित लाखों कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ाया और आज वही राष्ट्रवादी विचार भारत के विकास तथा आत्मनिर्भरता की नई यात्रा का आधार बन चुका है।
 

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