भूमि रिकॉर्ड और डिजिटल एड्रेसिंग सिस्टम के एकीकरण पर मंथन

ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने बुधवार को राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) और डाक विभाग के साथ एक विचार-मंथन बैठक आयोजित की। बैठक का मकसद भारत के डिजिटल एड्रेसिंग फ्रेमवर्क के तहत यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) और DIGIPIN के बीच बेहतर तालमेल और एकीकरण की संभावनाओं पर चर्चा करना था।
बैठक की अध्यक्षता भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने की। इसमें संयुक्त सचिव (भूमि संसाधन) पी. नरहरि, डाक विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक (डाक) गोकुल कुलपति, राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) की निदेशक देबोलीना कुंडू सहित विभिन्न विभागों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में ULPIN और DIGIPIN की पूरक क्षमताओं का लाभ उठाने पर चर्चा हुई। ULPIN प्रत्येक ग्रामीण और शहरी भूमि पार्सल को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करता है, जबकि DIGIPIN सटीक भू-संदर्भित स्थान पहचान सुनिश्चित करता है। दोनों प्रणालियों के एकीकरण से विभिन्न सरकारी प्लेटफॉर्मों के बीच अंतरसंचालनीयता बढ़ने और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
प्रतिभागियों ने व्यावहारिक उपयोग के मामलों का परीक्षण करने के लिए पायलट परियोजनाएं शुरू करने तथा सरकारी प्लेटफॉर्मों पर सहज एकीकरण के लिए ओपन और मानक-आधारित API आर्किटेक्चर विकसित करने पर सहमति जताई। इस पहल से स्टार्टअप, डेवलपर्स और इनोवेटर्स को नागरिक-केंद्रित भू-स्थानिक अनुप्रयोग और नई डिजिटल सेवाएं विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
यह पहल भूमि प्रशासन के लिए सुरक्षित, अंतरसंचालनीय और भविष्य के अनुरूप डिजिटल ईकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। साथ ही यह डिजिटल इंडिया के विजन तथा खुले मानकों, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति के अनुरूप है।












YXG8.jpeg)



