दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के तीसरे दिन भारतीय सैन्य इतिहास एवं सांस्कृतिक विमर्श पर हुई चर्चा

नई दिल्ली | 12 जनवरी 2026: नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में निःशुल्क प्रवेश आगंतुकों को खासा आकर्षित कर रहा है। भारत मंडपम में आयोजित इस मेले में पुस्तक प्रेमियों की रिकॉर्ड उपस्थिति देखी जा रही है। सुबह से ही छात्र, पाठक और युवा अपने दोस्तों एवं परिजनों के साथ बड़ी संख्या में परिसर में पहुंच रहे हैं, जिससे यह मेला पुस्तकों और विचारों के जीवंत सार्वजनिक उत्सव में परिवर्तित हो रहा है।
मेले के प्रमुख आकर्षणों में से एक ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा@75’ थीम पवेलियन विशेष रूप से चर्चा में रहा। आर्मी टैंकों की वास्तविक आकार की प्रतिकृतियाँ और विभिन्न हॉलों में वर्दीधारी सैन्य कर्मियों की उपस्थिति प्रमुख सेल्फी पॉइंट बन रही है। इस पवेलियन ने सभी आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित करते हुए मेले को एक मजबूत विजुअल एक्सपीरिएंस प्रदान किया।
आज पुस्तक मेले में पधारने वाले विशिष्ट अतिथियों में जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) इंडियन आर्म्ड फोर्सेज, श्री आर. एन. रवि, माननीय राज्यपाल, तमिलनाडु, सुश्री हेमा मालिनी, वरिष्ठ अभिनेत्री एवं लोकसभा सांसद तथा सुश्री स्मृति ईरानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल रहीं। थीम पवेलियन का भ्रमण करते हुए जनरल अनिल चौहान ने इसकी संकल्पना और प्रस्तुति की सराहना की। वहीं थीम पवेलियन में आयोजित सत्र में सुश्री स्मृति ईरानी ने नेतृत्व, जनसेवा और जमीनी स्तर से राष्ट्रीय जिम्मेदारी तक की यात्रा पर अपने विचार साझा किए। वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रख्यात वक्ता स्मृति ईरानी ने भारत लिटरेचर फेस्टिवल के एक विशेष सत्र ग्रासरूट टू दि हेल्म : ए जर्नी ऑफ लीडरशिप विद स्मृति ईरानी में भाग लिया। उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले के इतिहास में यह पहली बार है जब दर्शन और शौर्य का एक साथ उत्सव मनाया जा रहा है, जिसे उन्होंने साहित्य और प्रौद्योगिकी का अनोखा संगम बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि साहित्य और विचार केवल पढ़ने के साधन नहीं हैं, बल्कि यह जीवन को समझने और जीने के नया तरीका सिखाते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सामग्री ग्रहण करने के माध्यम भले ही बदल गए हों, लेकिन विचारों की शक्ति एवं प्रभाव आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
इसके पश्चात सुश्री हेमा मालिनी कवि दास नारायण की कृष्ण भक्ति पर आधारित काव्य रचनाओं पर आयोजित दूसरे सत्र का हिस्सा बनीं। ‘कविवर दास नारायण के कृष्ण भक्ति पद’ विषयक इस कार्यक्रम में श्री अरुण माहेश्वरी और श्री विमलेश कांति वर्मा की उपस्थिति रही, जबकि हेमा मालिनी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
सुश्री हेमा मालिनी ने कहा कि यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं, बल्कि भक्ति काव्य और आध्यात्मिक अनुभूति का उत्सव है। यह कृति उस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिसकी जड़ें सूरदास और मीराबाई जैसे महान कवियों में मिलती हैं।
इंटरनेशनल इवेंट कॉर्नर में दिखा इतिहास, सांस्कृतिक स्मृति और कविता का समागम
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के अंतर्गत इंटरनेशनल इवेंट कॉर्नर में आयोजित एक पैनल चर्चा में कज़ाख प्रोफेसर एवं इतिहासकार डॉ. सत्तार एफ. मज़ितोव ने इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। मध्य एशियाई देश कज़ाख़स्तान की स्वतंत्रता के 35 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने राज्य के बहुआयामी विकास और स्थिरता के आधार के रूप में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर प्रकाश डाला। सत्र के एक अन्य भाग में कज़ाख़स्तान और भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा हुई। डॉ. मज़ितोव ने श्रीनगर में दफन कज़ाख़ इतिहासकार मिर्ज़ा मुहम्मद हैदर दुगलत का उदाहरण देते हुए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को रेखांकित किया।
इसके बाद एक अन्य विचारोत्तेजक सत्र में स्पेन और भारत के कवियों ने मंच साझा किया और स्पेनिश, बास्क, कैटलन, अस्तूरियन, बांग्ला और हिंदी भाषाओं के माध्यम से भाषायी विविधता का उत्सव मनाया। यह काव्य संवाद प्रमुख रूप से महिलाओं की आवाज़, उनकी स्वायत्तता और प्रेम की उनकी अवधारणा के इर्द-गिर्द रहा।
लेखक मंच पर ‘नया नारी विमर्श’ पुस्तक का लोकार्पण एवं चर्चा
खुद को ‘गुलाबी फेमिनिस्ट’ बताते हुए, हास्य और सशक्त सामाजिक संदेशों के संतुलन के साथ प्रसिद्ध हिंदी लेखिका ममता कालिया ने महिलाओं से अपने अधिकारों, प्रतिरोध और जीवनानुभवों पर निर्भीक होकर लिखने का आह्वान किया। वे लेखक मंच पर आयोजित ‘नया नारी विमर्श’ पुस्तक पर केंद्रित चर्चा में भाग ले रही थीं। चर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ. बलवंत कौर भी शामिल रहीं, जिन्होंने ममता कालिया की साहित्यिक यात्रा की सराहना करते हुए उनके स्त्रीवादी विचारों के विकास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह सामाजिक धारणा कि स्त्री की शारीरिक शुचिता को उसके सम्मान से जोड़ा जाता है, ममता कालिया के साहित्य का केंद्रीय विषय रहा है।
कला, कहानी एवं कल्पना के पहियों पर सवार
मेले के तीसरे दिन किड्ज़ एक्सप्रेस ने बच्चों को कहानियों, पात्रों और रचनात्मकता की दुनिया की सैर कराई। दिन भर विभिन्न रोचक और शिक्षाप्रद गतिविधियों में 2,500 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। “रंग दो दुनिया सारी” लिखी एक दीवार बच्चों (और बड़ों) की डूडल्स, रंगों और ठहाकों से जीवंत हो उठी, जहाँ सभी ने लाइफ साइज कैनवस पर रंग भरकर अपनी कल्पनाओं को अभिव्यक्त किया। रामेन्द्र कुमार की पुस्तक ‘देव’, जो महाभारत के प्रिय पौराणिक पात्र घटोत्कच की समकालीन पुनर्व्याख्या पर आधारित है, का विमोचन किया गया। इस अवसर पर श्री कुमार विक्रम, मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक, एनबीटी-भारत तथा सुश्री कंचन वांचू शर्मा, उपनिदेशक, एनसीसीएव, एनबीटी-भारत उपस्थित रहीं।
‘ट्रेनिंग द ट्रेनर्स प्रोग्राम’ के अंतर्गत शिक्षक एवं वैदिक गणित विशेषज्ञ श्री विवेक कुमार ने वैदिक गणित पर एक सजीव और संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें शिक्षक, शिक्षाविद् और अभिभावक शामिल हुए।
शाम को राजस्थान के थार मरुस्थल से आए सुप्रसिद्ध लोक संगीतकार मांगणियार ने एम्फीथिएटर 1 में अपनी हृदयस्पर्शी लोक गायकी और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की लयबद्ध प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पाठकों, परिवारों, छात्रों, शिक्षकों और पुस्तक प्रेमियों को 10 से 18 जनवरी (निःशुल्क प्रवेश) तक भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में पधारकर वैश्विक साहित्य को जानने, लेखकों और विचारों से संवाद करने तथा पढ़ने और नॉलेज इंडिया के सबसे बड़े उत्सव का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया है।




