जर्मनी के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को ताइवान पहुंचा।

INPUT (DPA)
चीन के साथ बढ़ते तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच जर्मनी के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को ताइवान पहुंचा। इस दौरे का उद्देश्य ताइवान के साथ राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जर्मनी की ग्रीन पार्टी के सांसद Till Steffen कर रहे हैं। पांच सदस्यीय इस दल में जर्मनी की सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी CDU के सांसद Klaus-Peter Willsch और Markus Reichel, दक्षिणपंथी AfD के Rainer Kraft तथा वामपंथी पार्टी की सांसद Mandy Eißing शामिल हैं।
यह प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को ताइवान के राष्ट्रपति Lai Ching-te से मुलाकात करेगा। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति Tsai Ing-wen, सांसदों, सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत और सिविल सोसायटी समूहों के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं।
जर्मन सांसद टिल स्टेफन ने कहा कि ताइवान जर्मनी के लिए “बहुत महत्वपूर्ण साझेदार” है और दोनों लोकतांत्रिक देशों के सामने अधिनायकवादी ताकतों की चुनौती समान है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब पहले जैसा “पूरी तरह भरोसेमंद साझेदार” नहीं माना जा रहा, इसलिए यूरोप और ताइवान के बीच सहयोग और अहम हो गया है।
प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को सेंट्रल ताइवान साइंस पार्क का दौरा करेगा, जहां सेमीकंडक्टर उद्योग और तकनीकी सहयोग पर चर्चा होगी। ताइवान की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी TSMC का जर्मनी के ड्रेसडेन शहर में भी बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसे यूरोप-ताइवान रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
उधर चीन लगातार ताइवान को अपना हिस्सा बताता रहा है और अन्य देशों के ताइवान के साथ आधिकारिक संपर्कों का विरोध करता है। इससे पहले 2022 में जब जर्मन सांसदों का एक दल ताइवान गया था, तब बीजिंग ने कड़ी आपत्ति जताई थी और “वन चाइना पॉलिसी” का पालन करने की चेतावनी दी थी।
ताइवान 1949 से स्वतंत्र सरकार के तहत संचालित हो रहा है और आज एशिया के प्रमुख लोकतांत्रिक तथा तकनीकी केंद्रों में गिना जाता है, जबकि चीन उसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है।





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