जर्मनी में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, सर्वे में 90% लोगों ने कहा- स्कूलों में स्टाफ बढ़ाना जरूरी

जर्मनी में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, सर्वे में 90% लोगों ने कहा- स्कूलों में स्टाफ बढ़ाना जरूरी
(DPA)
Germany की शिक्षा व्यवस्था में समान अवसरों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। एक नए सर्वेक्षण में 10 में से 9 जर्मन नागरिकों ने माना है कि स्कूलों और किंडरगार्टन में बेहतर स्टाफिंग के बिना शिक्षा में बराबरी सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
यह सर्वे German Children's Fund की ओर से कराया गया, जिसमें करीब 1000 वयस्कों और 10 से 17 वर्ष आयु के 1000 बच्चों की राय ली गई। सर्वे एजेंसी फोर्सा ने 7 से 16 जनवरी 2026 के बीच यह अध्ययन किया।
रिपोर्ट के अनुसार 93 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को समान अवसर देने के लिए स्कूलों और किंडरगार्टन में अतिरिक्त शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति बेहद जरूरी है।
सर्वे में 91 प्रतिशत लोगों ने पूरे देश में एक समान शिक्षा मानकों की जरूरत बताई, जबकि 90 प्रतिशत लोगों ने प्री-स्कूल से लेकर स्कूली शिक्षा तक मुफ्त शिक्षा को महत्वपूर्ण माना। इसके अलावा 88 प्रतिशत लोगों ने किंडरगार्टन, स्कूल और युवा कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 84 प्रतिशत लोग उन स्कूलों को अधिक आर्थिक सहायता देने के पक्ष में हैं, जहां गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़े परिवारों के बच्चे अधिक संख्या में पढ़ते हैं।
बच्चों की राय भी काफी हद तक इसी दिशा में रही। 88 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि किंडरगार्टन, स्कूल और पढ़ाई की सामग्री तक मुफ्त पहुंच सबसे महत्वपूर्ण है। वहीं 87 प्रतिशत बच्चों ने पूरे जर्मनी में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने का समर्थन किया।
सर्वे में शामिल 78 प्रतिशत बच्चों ने शरणार्थी बच्चों को जल्द से जल्द स्कूल में दाखिला देने का समर्थन किया।
जर्मनी की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती उसका विकेंद्रीकृत ढांचा माना जाता है। देश के 16 राज्यों की अपनी-अपनी शिक्षा नीतियां हैं, जिसके कारण नियम और सुविधाएं अलग-अलग हैं।
उदाहरण के तौर पर Berlin में किंडरगार्टन शिक्षा मुफ्त है, जबकि North Rhine-Westphalia में ऐसा नहीं है। इसी तरह बर्लिन में बच्चे सातवीं कक्षा से माध्यमिक शिक्षा शुरू करते हैं, जबकि नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया में प्राथमिक शिक्षा केवल चौथी कक्षा तक होती है।
हालांकि पूरे जर्मनी में सरकारी स्कूल और विश्वविद्यालयों की पढ़ाई मुफ्त है, लेकिन किताबों और अन्य शैक्षणिक सामग्री का खर्च कई बार अभिभावकों को खुद उठाना पड़ता है।





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