जल सुरक्षा को नई दिशा: राष्ट्रीय कार्यशाला में लॉन्च हुआ ‘जल पर महा मिशन’, इसरो के साथ बड़ा समझौता

नई दिल्ली। भारत में जल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन और सतत जल प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में सरकार, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग, एमएसएमई और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े 500 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया। कार्यशाला में जल अनुसंधान एवं नवाचार इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, इसरो अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन, एएनआरएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति निर्माता और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जल हमारी सभ्यता और विकास की पहचान: सी.आर. पाटिल
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि जल केवल एक संसाधन नहीं बल्कि हमारी सभ्यता और विकास की पहचान है। उन्होंने जल क्षेत्र की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जन भागीदारी को समान रूप से महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने जानकारी दी कि जल क्षेत्र में अब तक 315 से अधिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनमें 113 परियोजनाओं को मंत्रालय का प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है। उन्होंने ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि देशभर में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं स्थापित की गई हैं।
‘जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन’ अभियान की घोषणा
कार्यशाला के दौरान मंत्री ने ‘जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन (JSJB:CTR)’ नामक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की। इसका उद्देश्य नागरिकों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों की भागीदारी से सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण को और मजबूत बनाना है।
विकसित भारत 2047 के लिए जल क्षेत्र में समग्र दृष्टिकोण जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने जल प्रबंधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए ‘जल पर महा मिशन’ के शुभारंभ को ऐतिहासिक कदम बताया।उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय और इसरो के सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरिक्ष आधारित तकनीकें जल संसाधन प्रबंधन की दिशा बदल सकती हैं। साथ ही एएनआरएफ और जल शक्ति मंत्रालय की ओर से संयुक्त अनुसंधान आमंत्रण की भी घोषणा की गई।
लॉन्च हुआ ‘जल पर महा मिशन’
कार्यशाला की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में ‘जल पर महा मिशन’ (Mission for Advancement in High-impact Areas related to Water) का शुभारंभ रहा। यह मिशन जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और उभरती तकनीकों से जुड़े उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान को बढ़ावा देगा।मिशन के तहत सरकारी संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाकर व्यावहारिक और प्रभावी समाधान विकसित किए जाएंगे।
स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए खुला आमंत्रण
‘भारत जल नवाचार नेटवर्क (Bharat-WIN)’ के तहत स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए एक खुली आमंत्रण पहल भी शुरू की गई। इसका उद्देश्य जल संरक्षण, जल उपयोग दक्षता, जल गुणवत्ता प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल जल प्रणालियों के लिए नवाचार आधारित उत्पादों और प्रोटोटाइप्स को बढ़ावा देना है।
जल शक्ति मंत्रालय और इसरो के बीच अहम समझौता
कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्रालय और इसरो के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रिमोट सेंसिंग, उपग्रह आधारित अवलोकन और भू-स्थानिक डेटा का उपयोग जल संसाधनों की योजना, निगरानी और निर्णय प्रक्रिया में किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी डेटा आधारित जल शासन और वैज्ञानिक जल प्रबंधन को नई दिशा देगी।
तकनीकी सत्रों में उभरीं भविष्य की प्राथमिकताएं
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में हिमालयी क्षेत्रों, नदी घाटियों, भूजल आधारित क्षेत्रों, तटीय इलाकों, शहरी केंद्रों और सूखा प्रभावित क्षेत्रों से जुड़ी जल चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य विषयों में शामिल रहे
जलवायु परिवर्तन अनुकूलन
भूजल संरक्षण और स्थिरता
सिंचाई दक्षता
जल गुणवत्ता प्रबंधन
नदी एवं जलाशय प्रबंधन
बाढ़ और सूखा प्रबंधन
शहरी जल सुरक्षा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जल समाधान
भू-स्थानिक एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियां
प्रदर्शनी में दिखी नवाचार की ताकत
कार्यशाला के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में जल क्षेत्र से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, भू-स्थानिक अनुप्रयोगों, स्टार्टअप नवाचारों और सफल जमीनी परियोजनाओं का प्रदर्शन किया गया। साथ ही पिछले 12 वर्षों में जल क्षेत्र में हुए अनुसंधान एवं नवाचारों पर आधारित एक विशेष लघु फिल्म भी दिखाई गई।
विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह कार्यशाला सरकार, वैज्ञानिक समुदाय, उद्योग और समाज के बीच सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगी। इससे जल अनुसंधान में निवेश, नवाचार आधारित समाधान, तकनीकी हस्तांतरण और जल सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को गति मिलने की उम्मीद है।जल पर महा मिशन, भारत-विन पहल और इसरो के साथ साझेदारी जैसे कदम भारत को जल-सुरक्षित, जलवायु-अनुकूल और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।






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