भारत 4-5 जून, 2026 को वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक की मेजबानी करेगा

संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने आज घोषणा की कि ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (सीडब्ल्यूजी) की दूसरी बैठक 4-5 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित की जाएगी। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अतिरिक्त सचिव श्रीमती अमिता प्रसाद साराभाई, संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। आगामी 4-5 जून 2026 को होने वाली यह दो-दिवसीय बैठक भारत के ब्रिक्स 2026 के विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण” के अनुरूप सांस्कृतिक सहयोग पर व्यवस्थित बहुपक्षीय संवाद को बढ़ावा देगी।चर्चा हेतु प्राथमिकता वाले क्षेत्र
2026 ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की चर्चाएं तीन प्रमुख विषयगत प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द आधारित होंगी:
1. रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योग, कॉपीराइट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
2. सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक संपदा की वापसी
3. संस्कृति, जलवायु और सतत विकास
ये प्राथमिकताएं नवाचार, सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करने, सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने, विरासत संरक्षण और बहाली सहयोग को आगे बढ़ाने और 2030 के बाद के वैश्विक सतत विकास एजेंडा के साथ जुड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
ब्रिक्स सांस्कृतिक सहयोग में भारत की भूमिका
भारत ने ब्रिक्स के भीतर सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है। संस्कृति मंत्रालय ने भारत की अध्यक्षता के तहत 2016 में गोवा और 2021 में नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों की बैठकों की मेजबानी की और 2026 की अपनी अध्यक्षता के दौरान रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करना जारी रखेगा।
ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह, जिसे 2015 में ब्रिक्स सदस्य देशों की सरकारों के बीच संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग पर हस्ताक्षरित समझौते से अपना अधिकार हासिल होता है, ने वर्षों से सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मक उद्योगों, फिल्मों, संग्रहालयों, अभिलेखागारों और डिजिटल सांस्कृतिक इकोसिस्टम में सहयोग का विस्तार किया है।
ब्रिक्स के बारे में
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हैं और 2025 में 10 भागीदार देश इसमें शामिल हुए। यह समूह राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय, और सांस्कृतिक एवं जन-संबंधी क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग के एक मंच का प्रतिनिधित्व करता है, जो सामूहिक रूप से अधिक समावेशी और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आगे बढ़ाता है।






YXG8.jpeg)



