बाल्टिक सागर में NATO का बड़ा सैन्य अभ्यास BALTOPS शुरू

ग्डिन्या (पोलैंड): रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बाल्टिक क्षेत्र में NATO ने अपनी सैन्य मौजूदगी और ताकत का प्रदर्शन करते हुए बड़े नौसैनिक अभ्यास BALTOPS 2026 की शुरुआत कर दी है। पोलैंड के ग्डिन्या बंदरगाह से शुरू हुए इस दो सप्ताह लंबे अभ्यास में 15 देशों के 6,000 से अधिक सैनिक, 30 से ज्यादा युद्धपोत और कई नौसैनिक विमान हिस्सा ले रहे हैं।
इस सैन्य अभ्यास का नेतृत्व अमेरिकी नौसेना कर रही है। अभ्यास का समापन जर्मनी के कील शहर में होगा। जर्मनी ने इसमें फ्रिगेट Sachsen-Anhalt, कॉर्वेट Braunschweigऔर Erfurt पनडुब्बी U34 तथा समुद्री निगरानी विमान को तैनात किया है।
जर्मन नौसेना के रियर एडमिरल स्टीफन हैश ने कहा कि इस अभ्यास के दौरान युद्धपोतों, नौकाओं, नौसैनिक विमानों और मानवरहित प्रणालियों (ड्रोन) का व्यापक उपयोग किया जाएगा। उनका कहना है कि इससे NATO की समुद्री उपस्थिति और सामूहिक सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर
BALTOPS 2026 का मुख्य उद्देश्य बाल्टिक सागर में समुद्री यातायात और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। NATO के अनुसार यह अभ्यास संभावित खतरों के खिलाफ मजबूत प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) का भी संदेश देता है।
बाल्टिक सागर को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया है। बाल्टिक सागर से लगे नौ देशों में रूस अकेला ऐसा देश है जो NATO का सदस्य नहीं है।
शीत युद्ध के दौर से चला आ रहा है BALTOPS
BALTOPS अभ्यास की शुरुआत शीत युद्ध के समय हुई थी। NATO के अनुसार मई 1971 में अमेरिकी विमानवाहक पोत Intrepidऔर तीन विध्वंसक जहाज बाल्टिक सागर में सोवियत संघ की समुद्री सीमाओं के करीब पहुंचे थे। उस समय सोवियत टोही विमानों ने उनकी चौबीसों घंटे निगरानी की थी।
इस अभ्यास का मूल उद्देश्य NATO नौसेना को बाल्टिक सागर में प्रभावी रूप से संचालित करने और किसी संभावित प्रतिद्वंद्वी नौसेना को उत्तरी सागर तथा अटलांटिक महासागर की ओर बढ़ने से रोकने की क्षमता विकसित करना रहा है।
रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच BALTOPS 2026 को NATO की सामूहिक सैन्य तैयारी और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
Input DPA







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